द लोकतंत्र/ रायपुर : Film Shatak Tax Free in CG छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने राजधानी रायपुर के एक निजी मॉल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर आधारित फिल्म ‘शतक’ का प्रदर्शन देखा। इस अवसर पर राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘शतक’ महज एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, जनसेवा और संगठनात्मक समर्पण की सौ वर्ष लंबी साधना का जीवंत दस्तावेज है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि छत्तीसगढ़ में इस फिल्म को टैक्स-फ्री किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे देख सकें और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तक संघ की प्रेरक यात्रा और उसके मूल्यों को पहुंचाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
राष्ट्र निर्माण और समर्पण की गाथा
मुख्यमंत्री साय ने अपने वक्तव्य में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना पूजनीय Keshav Baliram Hedgewar के दूरदर्शी विचारों और त्याग से हुई थी। बाद में पूजनीय Madhav Sadashiv Golwalkar ने संगठन को व्यापक दिशा और मजबूती प्रदान की। उन्होंने कहा कि एक शताब्दी की यह यात्रा लाखों स्वयंसेवकों के अनुशासन, निष्ठा और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का प्रतीक है।
साय ने कहा कि फिल्म ‘शतक’ के माध्यम से दर्शकों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि किस प्रकार संघ ने विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियों के बीच अपने सिद्धांतों के साथ कार्य किया। उनके अनुसार, यह फिल्म संगठन की विचारधारा और सेवा कार्यों की व्यापक झलक प्रस्तुत करती है।
शिक्षा, सेवा और सामाजिक समरसता पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आपदा और संकट के समय संघ के कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी ने समाज को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था में भी जनसेवा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना ही मूल प्रेरणा होनी चाहिए।
साय ने विश्वास जताया कि ‘शतक’ फिल्म युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक और प्रेरित करेगी। उन्होंने इसे एक ऐसी कड़ी बताया जो अतीत की प्रेरणादायक यात्रा को वर्तमान और भविष्य की जिम्मेदारियों से जोड़ती है। छत्तीसगढ़ में फिल्म को टैक्स-फ्री किए जाने के फैसले को सांस्कृतिक और वैचारिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे दर्शकों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।

