द लोकतंत्र/ रायपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू झारखंड के गुमला में आयोजित अंतरराज्यीय जन सांस्कृतिक समागम समारोह में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ के जशपुर पहुंचीं। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया, जहां राज्यपाल रमन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। इस आयोजन का उद्देश्य तीन राज्यों—छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा की जनजातीय संस्कृति, कला और परंपरा को एक मंच पर लाना रहा, जिसमें राष्ट्रपति की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा दी।
राष्ट्रपति मुर्मू का आगमन जनजातीय समाज के लिए सौभाग्य और गर्व की बात
कार्यक्रम में संबोधन देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का आगमन जनजातीय समाज के लिए सौभाग्य और गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि जन-सांस्कृतिक समागम जनजातीय संस्कृति संरक्षण का एक पवित्र प्रयास है, जो आने वाली पीढ़ियों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सीएम साय ने कहा कि राष्ट्रपति पहले भी आदिवासी गौरव सम्मान समारोह में शामिल हो चुकी हैं और जनजातीय समुदाय के upliftment के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। उनकी नीतियाँ व मार्गदर्शन समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
सीएम ने अपने संबोधन में आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का बड़ा हिस्सा पहले नक्सलवाद से प्रभावित था, जिसके कारण विकास और प्रशासनिक सुविधाएँ वहां तक नहीं पहुंच पाती थीं। लेकिन केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन सरकार’ की रणनीति के चलते अब स्थिति बदल रही है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लनार योजना के तहत बस्तर में सुरक्षा कैंपों की संख्या बढ़ाई गई है और लगातार संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के साहस को नमन करते हुए कहा कि सरकार के प्रयासों से अब बस्तर में शांति स्थापित हो रही है।
सीएम साय ने गिनायी उपलब्धियाँ
सीएम साय ने बताया कि आज बस्तर में 400 से अधिक गांव पुनर्स्थापित और आबाद हो चुके हैं। जिन इलाकों में कभी लोग कदम रखने से भी डरते थे, आज वहां राशन दुकानों, बिजली, स्कूल, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है और आने वाले समय में प्रदेश तीव्र गति से विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पर्यटन के लिए नई उद्योग नीति लागू की है, जिससे बस्तर और सरगुजा जैसे जनजातीय क्षेत्रों में नए रोजगार और विकास के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि गुमला में आयोजित यह समागम तीन राज्यों के सांस्कृतिक व आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव छत्तीसगढ़ के विकास पर दिखाई देगा।

