द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर एक बार फिर साहित्य, विचार और संस्कृति के संगम की साक्षी बनने जा रही है। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। नवा रायपुर स्थित संवाद भवन में आयोजित आयोजन समिति की समीक्षा बैठक में व्यवस्थाओं, कार्यक्रमों और सहभागिता को लेकर गहन मंथन किया गया। यह साफ संकेत है कि यह आयोजन अब केवल एक स्थानीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की बौद्धिक पहचान को मजबूती देने वाला मंच बनने जा रहा है।
तैयारियों की अंतिम समीक्षा, आयोजन को लेकर स्पष्ट रोडमैप
बैठक में आयोजन की संपूर्ण रूपरेखा, अतिथियों की सूची, साहित्यिक सत्रों की संरचना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रचार-प्रसार की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव सिर्फ एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की बौद्धिक चेतना, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और रचनात्मक ऊर्जा को देश के सामने रखने का अवसर है।
यह उत्सव 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित किया जाएगा, जो अपने आप में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक स्थल है।
साहित्य, विचार और युवा रचनात्मकता का साझा मंच
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार, विचारक और युवा रचनाकार एक साथ मंच साझा करेंगे। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में साहित्यिक संवाद, विचार-मंथन, पुस्तक विमोचन, कविता-पाठ, पैनल चर्चा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला चलेगा। इसके साथ ही एक विशाल पुस्तक मेला भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के प्रमुख प्रकाशन समूह भाग लेंगे। यह पुस्तक प्रेमियों और युवाओं के लिए एक विशेष आकर्षण होगा।
जनप्रतिनिधियों और विधायकों की भूमिका भी अहम
इस आयोजन को आकार देने में केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विधायकों की सक्रिय भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। आयोजन समिति के सूत्रों के अनुसार, जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार यह प्रयास किया गया कि रायपुर साहित्य उत्सव को केवल राजधानी तक सीमित न रखकर पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आवाज बनाया जाए। विधायकों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से आयोजन को ज़मीनी स्तर पर समर्थन मिला है, जिससे यह उत्सव जनभागीदारी और सांस्कृतिक समावेशन का उदाहरण बन सके।
पुरखौती मुक्तांगन बनेगा विचारों का केंद्र
पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित होने वाला यह उत्सव छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति और समकालीन साहित्य के बीच एक जीवंत संवाद स्थापित करेगा। यहां पारंपरिक और आधुनिक विचारों का ऐसा संगम देखने को मिलेगा, जो रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेगा।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 को देश के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों की श्रेणी में लाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। यह आयोजन न केवल लेखकों और पाठकों को जोड़ेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छवि को भी राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करेगा। आयोजन से जुड़ी विस्तृत कार्यक्रम-सारणी और अतिथियों की सूची जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।

