द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत के 2026 विधानसभा चुनावों के ताजा रुझान देश की राजनीतिक तस्वीर को एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ा करते हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) जहां पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में शानदार प्रदर्शन कर रही है, वहीं दक्षिण भारत के राज्यों में उसे अभी भी मजबूत पकड़ बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इन चुनावी आंकड़ों से साफ संकेत मिलता है कि पार्टी का प्रभाव क्षेत्रीय रूप से असंतुलित बना हुआ है।
पश्चिम बंगाल और असम में BJP का दमदार प्रदर्शन
पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल में BJP ने अप्रत्याशित बढ़त हासिल कर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। 293 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए लगभग 199 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) करीब 87 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। यह प्रदर्शन राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।
इसी तरह असम में भी BJP और उसके सहयोगी दलों का गठबंधन मजबूत स्थिति में है। 126 सीटों वाली विधानसभा में गठबंधन लगभग 97 सीटों पर आगे चल रहा है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन काफी पीछे दिखाई दे रहा है। यह परिणाम पूर्वोत्तर में BJP के बढ़ते प्रभाव को और पुख्ता करता है।
दक्षिण भारत में BJP के लिए कड़ी चुनौती
दक्षिण भारत में तस्वीर बिल्कुल उलट है। तमिलनाडु में BJP को सीमित सफलता मिलती दिख रही है। 234 सीटों में पार्टी केवल 3 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यहां मुख्य मुकाबला DMK, AIADMK और TVK के बीच केंद्रित है, जिससे BJP के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करना मुश्किल हो रहा है।
वहीं केरल में भी BJP की स्थिति सीमित बनी हुई है। 140 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी सिर्फ दो सीटों पर आगे है। यहां United Democratic Front (UDF) और Left Democratic Front (LDF) के बीच सीधा मुकाबला है, जहां UDF लगभग 96 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह दर्शाता है कि केरल में पारंपरिक राजनीतिक समीकरण अभी भी कायम हैं।
पुडुचेरी में राहत की खबर
हालांकि दक्षिण में पुडुचेरी BJP के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। 30 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी 22 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 6 सीटों पर बनी हुई है। यह प्रदर्शन पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत देता है, खासकर उस क्षेत्र में जहां वह अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, 2026 के विधानसभा चुनावों के रुझान यह स्पष्ट करते हैं कि BJP ने पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया है, लेकिन दक्षिण भारत में उसे अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। आने वाले समय में पार्टी की रणनीति इन क्षेत्रीय असमानताओं को संतुलित करने पर केंद्रित रहेगी।

