द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है। नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए ICC Women’s ODI World Cup 2025 के फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर पहली बार वनडे विश्व कप अपने नाम कर लिया। महिला क्रिकेट के 52 साल पुराने इतिहास में यह भारत का पहला खिताब है। इससे पहले टीम इंडिया 2005 और 2017 के फाइनल में पहुंचकर खिताब से चूक गई थी, लेकिन इस बार हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम ने सपनों को हकीकत में बदल दिया।
शेफाली-दीप्ति की जोड़ी ने किया कमाल, भारत ने रखा विशाल लक्ष्य
बारिश के कारण देरी से शुरू हुए फाइनल में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट पर 298 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। शेफाली वर्मा ने मैच में शानदार 87 रन की पारी खेली और प्लेइंग-11 में रिप्लेसमेंट के तौर पर शामिल होने के बावजूद अपनी क्लास का दम दिखा दिया। उनके साथ स्मृति मंधाना ने 45 रन जोड़े, जबकि दीप्ति शर्मा ने संयम और अनुभव दिखाते हुए 54 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। युवा बल्लेबाज रिचा घोष ने 34 रन की तेज पारी खेलकर स्कोर को मजबूत किया। भारत के बल्लेबाजों ने लगातार रन गति बनाए रखी, जिसने दक्षिण अफ्रीका पर मानसिक दबाव बनाया।
द. अफ्रीका की कप्तान ने लड़ी अकेली जंग, दीप्ति ने पलटा मैच
299 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी रही। कप्तान लौरा वोल्वार्ट (101) ने शानदार शतक जमाया और टीम को मैच में बनाए रखा। हालांकि दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे। भारत की गेंदबाजी यूनिट ने दबाव बनाए रखा, जिसमें दीप्ति शर्मा सबसे चमकीं। उन्होंने 5 विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीका की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कप्तान हरमनप्रीत ने साहसिक फैसले लेते हुए शेफाली को गेंद सौंपी और शेफाली ने भी 2 महत्वपूर्ण विकेट लेकर यह दांव सफल बना दिया। जैसे ही दीप्ति ने वोल्वार्ट को आउट किया, भारतीय फैंस को पता चल गया कि अब इतिहास बनने से कोई नहीं रोक सकता।
25 साल बाद महिला क्रिकेट को नया विश्व चैंपियन
महिला वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में अब तक ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ही चैंपियन बने थे। 2000 में न्यूजीलैंड की जीत के बाद पहली बार 25 साल बाद क्रिकेट को भारत के रूप में नया विश्व विजेता मिला है। हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी में साहस, रणनीति एवं धैर्य का परिचय दिया और टीम को गोल्डन ट्रॉफी दिलाई। यह उपलब्धि भारतीय महिला क्रिकेट के सुनहरे युग की शुरुआत है।

