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Budget 2026: रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी: 2026-27 में ₹7.8 लाख करोड़ का आवंटन

Budget 2026: Historic increase in defense budget: ₹7.8 lakh crore allocated for 2026-27.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Budget 2026 केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय को अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटित किया है। कुल ₹7.8 लाख करोड़ के रक्षा बजट के साथ सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भर भारत उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। यह आवंटन पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 प्रतिशत अधिक है, जो रक्षा क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे निवेश को दर्शाता है।

रक्षा मंत्रालय के लिए कैपिटल आउटले (पूंजीगत व्यय) में खास तौर पर बड़ा उछाल देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2025-26 में जहां यह राशि ₹1.80 लाख करोड़ थी, वहीं 2026-27 में इसे बढ़ाकर ₹2.19 लाख करोड़ कर दिया गया है। यानी कैपिटल आउटले में 21.84 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह पैसा मुख्य रूप से सेनाओं के आधुनिकीकरण, नई तकनीक, हथियार प्रणालियों और उन्नत सैन्य उपकरणों पर खर्च होगा।

महत्वपूर्ण रक्षा सौदों से भारत की ताकत बढ़ाने का एजेंडा

सरकार के एजेंडे में कई बड़े रक्षा सौदे शामिल हैं। आने वाले समय में राफेल लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) से जुड़े अहम करार किए जाने की संभावना है। इन परियोजनाओं से न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत बढ़ेगी, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।

बजट आंकड़ों पर नज़र डालें तो डिफेंस सर्विसेज (रेवेन्यू) के लिए ₹3,65,478.98 करोड़ और कैपिटल आउटले के लिए ₹2,19,306.47 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इनमें क्रमशः 17.24 प्रतिशत और 21.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं डिफेंस पेंशन के लिए भी सरकार ने ₹1,71,338.22 करोड़ का प्रावधान किया है, जो पूर्व सैनिकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, डिफेंस बजट (सिविल) में मामूली कटौती की गई है और यह पिछले वर्ष के ₹28,554.61 करोड़ की तुलना में 0.45 प्रतिशत कम हुआ है।

रक्षा क्षेत्र में मरम्मत हेतु आयातित माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट

रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान पुर्ज़ों के निर्माण हेतु आयातित कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट दी जाएगी। इससे देश में रक्षा विनिर्माण को सीधा लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के मद्देनज़र सरकार ने व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित सभी ड्यूटेबल वस्तुओं पर टैरिफ दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है। अब सीफूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले निर्दिष्ट इनपुट्स के ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दी गई है। यह सीमा पिछले वर्ष के निर्यात टर्नओवर के FOB मूल्य के आधार पर तय होगी।

साथ ही, जूता उद्योग को राहत देते हुए सरकार ने शू अपर के निर्यात पर भी ड्यूटी-फ्री इनपुट आयात की सुविधा देने का ऐलान किया है। लिथियम-आयन बैटरी और क्रिटिकल मिनरल्स के निर्माण में उपयोग होने वाली पूंजीगत वस्तुओं पर भी बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट का प्रस्ताव रखा गया है। कुल मिलाकर, रक्षा मंत्रालय को मिला यह रिकॉर्ड बजट और केंद्रीय बजट में किए गए ये सुधार न केवल भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करेंगे, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और निर्यात को भी नई गति देंगे।

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Team The Loktantra

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