द लोकतंत्र : वित्त मंत्रालय में आगामी केंद्रीय बजट 2026 की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। यह बजट भारतीय आर्थिक इतिहास में एक ‘वाटरशेड’ क्षण (Watershed Moment) सिद्ध होने जा रहा है, क्योंकि यह मौजूदा आयकर अधिनियम 1961 के तहत प्रस्तुत होने वाला अंतिम बजट होगा। 1 अप्रैल 2026 से प्रस्तावित ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ लागू होने जा रहा है, जो पिछले छह दशकों से चली आ रही जटिल कर व्यवस्था का स्थान लेगा। इस परिवर्तनकारी मोड़ पर, देश का नौकरीपेशा वर्ग और मध्यम वर्गीय करदाता सरकार से न केवल सरलीकरण बल्कि प्रत्यक्ष आर्थिक राहत की बड़ी आकांक्षाएं पाले हुए हैं।
होम लोन और अचल संपत्ति: मध्यम वर्ग की प्राथमिकता
रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों और उच्च ब्याज दरों के बीच, करदाताओं के लिए घर खरीदना एक बड़ी वित्तीय चुनौती बन गया है।
- छूट की सीमा में वृद्धि: वर्तमान में आयकर की धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर ₹2 लाख की वार्षिक कटौती उपलब्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण लागत और संपत्तियों के मूल्यांकन में हुई भारी वृद्धि को देखते हुए, इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम ₹3.5 लाख से ₹4 लाख किया जाना चाहिए। इससे ‘सभी के लिए आवास’ के सरकारी लक्ष्य को भी गति मिलेगी।
बचत और निवेश: धारा 80C का भविष्य
करीब एक दशक से धारा 80C के तहत मिलने वाली ₹1.5 लाख की निवेश छूट स्थिर बनी हुई है, जबकि महंगाई दर (Inflation) में निरंतर वृद्धि हुई है।
- बुनियादी छूट सीमा: करदाताओं की मांग है कि बुनियादी कर छूट की सीमा (Basic Exemption Limit) को वर्तमान ₹2.5 लाख (पुरानी व्यवस्था) से बढ़ाकर महंगाई के अनुरूप समायोजित किया जाए।
- अनिवार्य खर्चों का समावेश: शिक्षा और स्वास्थ्य बीमा की बढ़ती लागत को देखते हुए, धारा 80C की सीमा को ₹2 लाख तक बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो सकता है। नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 में इन कटौतियों को अधिक तर्कसंगत बनाने की संभावना जताई जा रही है।
कैपिटल गेन और सरलीकरण: नियमों का जाल सुलझाने की चुनौती
वर्तमान में शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अचल संपत्ति (Property) पर लगने वाले ‘कैपिटल गेन टैक्स’ के नियम अत्यंत जटिल और भिन्न हैं।
- बजट 2026 से एक ‘यूनिफाइड टैक्स स्ट्रक्चर’ (Unified Tax Structure) की उम्मीद की जा रही है, जो निवेश के विभिन्न साधनों के लिए होल्डिंग अवधि और टैक्स दरों को सरल बनाएगा। इसके अतिरिक्त, रिफंड की प्रक्रिया में तेजी और टीडीएस (TDS) मिलान की विसंगतियों को दूर करना नए अधिनियम का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
निष्कर्षतः, बजट 2026 मात्र एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि भविष्य की कर रूपरेखा का ब्लूप्रिंट है। 60 वर्ष पुराने कानूनों को बदलकर नया एक्ट लाना सरकार की ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) की दिशा में एक साहसिक कदम है। यदि वित्त मंत्री मध्यम वर्ग की इन बुनियादी मांगों को स्वीकार करती हैं, तो यह न केवल करदाताओं के हाथ में खर्च करने योग्य आय (Disposable Income) बढ़ाएगा, बल्कि अर्थव्यवस्था में उपभोग की नई लहर पैदा करेगा।

