द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने गुरुवार (9 अक्टूबर 2025) को घोषणा की कि दो साल से जारी गाज़ा युद्ध अब समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ट्रंप ने आश्वासन दिया कि सीजफायर समझौते के पहले चरण के तहत गाज़ा में बचे हुए बंधकों को सोमवार (13 अक्टूबर) या मंगलवार (14 अक्टूबर) तक रिहा किया जाएगा।
ट्रंप ने बताया कि बुधवार (8 अक्टूबर) को मध्य पूर्व में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की गई, जिसे पहले असंभव माना जा रहा था। उन्होंने कहा, “हमने गाज़ा में युद्ध समाप्त कर दिया है और शेष सभी बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की जा रही है। यह प्रक्रिया जटिल है, लेकिन तय समय पर पूरी होगी।” उनके अनुसार, यह कदम स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
मिस्र में होंगे औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह मिस्र की यात्रा करेंगे, जहां गाज़ा शांति समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उनके प्रतिनिधि की ओर से पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन अब वे व्यक्तिगत रूप से इस प्रक्रिया को पूरा करेंगे।
दूसरी ओर, हमास ने ट्रंप के एक प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इस प्रस्ताव में गाज़ा प्रशासन के लिए ‘इंटरिम शांति बोर्ड’ बनाने और इसे अमेरिकी नेतृत्व में चलाने का प्रस्ताव था। हमास के वरिष्ठ अधिकारी ओसामा हमदान ने कहा कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण और अन्य गुट इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि कोई भी फिलिस्तीनी इस तरह के बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।
इजरायल और हमास ने बंधकों की रिहाई को लेकर सीजफायर समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत, इजरायली हिरासत में सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदी रिहा किए जाएंगे। इस कदम को क्षेत्र में मानवीय राहत और विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय निगाहें गाज़ा पर
दरअसल, ट्रंप का दावा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। अमेरिका इसे जहां ऐतिहासिक सफलता मान रहा है, वहीं फिलिस्तीनी गुट इसे राजनीतिक हस्तक्षेप कह रहे हैं। आने वाले दिनों में मिस्र में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर तय करेंगे कि गाज़ा युद्ध वास्तव में समाप्त हुआ है या यह केवल एक अस्थायी विराम है।

