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उन्नाव केस: कुलदीप सिंह सेंगर की बेटियां सामने आईं, सुप्रीम कोर्ट फैसले पर दी प्रतिक्रिया

Kuldeep Singh Sengar's daughters' statement has come to light; following the Supreme Court's order, Ishita and Aishwarya have raised questions about the judicial process.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने के बाद राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच अब आरोपी और भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की दोनों बेटियां सामने आई हैं। डॉ. इशिता सेंगर और ऐश्वर्या सेंगर ने फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रियाएं सार्वजनिक की हैं। जहां ऐश्वर्या सेंगर ने मीडिया के सामने बयान दिया, वहीं इशिता सेंगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर खुली चिट्ठी पोस्ट करते हुए कई सवाल उठाए।

हमारी बात सुनी ही नहीं गई – ऐश्वर्या सेंगर का बयान

कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी ऐश्वर्या ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को केस की मेरिट पर चर्चा शुरू ही नहीं हो सकी। उन्होंने दावा किया कि पीड़िता ने कथित तौर पर अपने बयान में कई बार बदलाव किया। ऐश्वर्या ने कहा, उसने तीन बार समय बदला, पहले दोपहर 2 बजे, फिर शाम 6 बजे और फिर रात 8 बजे। AIIMS मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में उसकी उम्र 18 साल से अधिक बताई गई थी।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि 8 साल से न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन परिवार की पीड़ा और नुकसान का कोई महत्व नहीं दिखता। हमारी इज्जत छिनी, शांति छिनी और हमें अपनी बात रखने का अधिकार भी नहीं मिला। फिर भी न्याय की उम्मीद है। मीडिया से आग्रह है कि गलत जानकारी न फैलाएं।

इशिता सेंगर की खुली चिट्ठी– मुझे सिर्फ ‘विधायक की बेटी’ बनाकर देखा गया

सेंगर की बड़ी बेटी डॉ. इशिता सेंगर ने X पर लिखे एक लंबे पत्र में कहा कि उन्हें वर्षों से केवल ‘एक भाजपा विधायक की बेटी’ की पहचान तक सीमित कर दिया गया, जिससे एक व्यक्ति के रूप में उनकी भावनाएँ और संघर्ष पीछे छूट गए। उन्होंने लिखा कि बिना पूरे तथ्य सामने आए, सोशल मीडिया और बहसों में उनके परिवार पर तीखे हमले किए गए।

इशिता ने कहा कि उनका परिवार कभी सड़कों पर प्रदर्शन नहीं करता, न ही मीडिया ट्रायल में शामिल हुआ। वे संस्थाओं और कानून पर भरोसा रखकर चुप रहे, पर इसी चुप्पी ने उन्हें आर्थिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान झेलने पर मजबूर किया। उन्होंने लिखा, मुझे कोई विशेष सुविधा नहीं चाहिए, सिर्फ निष्पक्ष न्याय चाहिए। न्याय व्यवस्था पर विश्वास है, लेकिन यह भरोसा अब टूटने की कगार पर है।

सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 उन्नाव रेप केस में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने के आदेश पर स्टे लगा दिया है। इसके साथ ही सेंगर को रिहाई से रोकते हुए कोर्ट ने CBI की अपील पर विचार करने का निर्णय लिया है।

उन्नाव मामला जहां लंबे समय से देश में चर्चा और विवाद का केंद्र है, वहीं अब आरोपी परिवार की प्रतिक्रियाओं ने बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई इस केस के भविष्य को तय करेगी।

Team The Loktantra

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