द लोकतंत्र : भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में गमन मानवीय जीवन की ऊर्जा को गहराई से प्रभावित करता है। सम्प्रति, 16 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ ही ‘खरमास’ की अवधि प्रारंभ हो चुकी है। धार्मिक ग्रंथों में इस समय को ‘शून्य मास’ भी कहा जाता है, जिसमें सूर्य और बृहस्पति की युति के कारण सांसारिक शुभ कार्यों के लिए आवश्यक ऊर्जा न्यून हो जाती है। यद्यपि यह काल विवाह और गृह प्रवेश जैसे उत्सवों के लिए वर्जित है, किंतु आत्मिक शुद्धि और साधना के लिए इसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
ग्रहों की स्थिति: बृहस्पति की राशि में सूर्य का प्रभाव
जब सूर्य देव देवगुरु बृहस्पति की राशियों (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तो वे गुरु की सेवा में लीन हो जाते हैं।
- शुभ ऊर्जा का लोप: सूर्य और बृहस्पति दोनों ही मांगलिक कार्यों के कारक हैं। गुरु की राशि में होने पर सूर्य का तेज मंदा पड़ जाता है, जिससे मुंडन, यज्ञोपवीत और विवाह जैसे संस्कार सफलतापूर्वक सम्पन्न होने में अवरोध आते हैं।
- आध्यात्मिक उत्थान: खगोलीय दृष्टि से यह समय ध्यान, तप और अनुष्ठान के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस अवधि में किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
विवाह बाधा निवारण: प्रतीक्षा नहीं, प्रयत्न का समय
भले ही खरमास में विवाह वर्जित हों, किंतु कुण्डली के विवाह दोषों को शांत करने के लिए यह सर्वोत्तम समय है।
- पीत वस्तुओं का महत्व: विवाह की बाधाओं को दूर करने के लिए भगवान विष्णु और सूर्य देव को पीले पुष्प अर्पित करें। पीले वस्त्रों का दान बृहस्पति को बलवान बनाता है।
- विशिष्ट मंत्र साधना: “ॐ श्रीं ह्रीं पूर्ण गृहस्थ सुख सिद्धये ह्रीं श्रीं ॐ नमः” मंत्र का नियमित जाप उन जातकों के लिए फलदायी है जिनकी शादी की बात बार-बार टूट जाती है।
2026 का विवाह कैलेंडर: मकर संक्रांति से शुक्र उदय तक
खरमास 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के दिन समाप्त होगा। किंतु इसके पश्चात भी शहनाइयां बजने में विलंब होगा।
- शुक्र अस्त की चुनौती: हिंदू धर्म में विवाह के लिए शुक्र तारे का उदय होना अनिवार्य है। जनवरी 2026 में शुक्र अस्त रहेगा, जिसके कारण विवाह का कोई मुहूर्त नहीं निकल रहा है।
- फरवरी से शुभ आरंभ: 01 फरवरी 2026 को शुक्र के उदय होते ही विवाह का सीजन प्रारंभ होगा। फरवरी माह में ही सर्वाधिक शुभ तिथियां उपलब्ध होंगी।
निष्कर्षतः, खरमास को अशुभ के बजाय ‘धार्मिक’ मास के रूप में देखा जाना चाहिए। यह समय सांसारिक प्रदर्शन से हटकर ईश्वर भक्ति में लीन होने का है। आगामी फरवरी 2026 में जब शुक्र का उदय होगा, तब पूरे देश में एक साथ विवाह कार्यों की बाढ़ आएगी, जिससे इवेंट मैनेजमेंट और आभूषण बाजार में भारी उछाल की संभावना है।

