द लोकतंत्र/राष्ट्रीय न्यूज़: लद्दाख में न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। Ladakh Bench Paperless Court के तहत यहां की न्यायिक व्यवस्था को पूरी तरह IT-enabled और कागजरहित बनाने की तैयारी है। Chief Justice of India (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को लेह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की लद्दाख बेंच का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कई डिजिटल पहलों की शुरुआत की, जिनका उद्देश्य दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए न्याय तक पहुंच आसान बनाना है।
लेह और करगिल के वकीलों को मिलेगा Virtual Access
CJI सूर्यकांत ने कहा कि लेह और करगिल के वकील जल्द ही लद्दाख बेंच से Supreme Court की कार्यवाही में वर्चुअल तरीके से शामिल हो सकेंगे। लद्दाख से जुड़े मामलों को एक दिन में सूचीबद्ध कर Video Conferencing के जरिए सुनवाई करने की व्यवस्था की जाएगी। इससे वकीलों और पक्षकारों को दिल्ली तक यात्रा करने में लगने वाला समय, खर्च और कठिनाई कम होगी।
उन्होंने कहा कि लद्दाख में न्याय तक पहुंच की समस्या केवल अदालत की दूरी से जुड़ी नहीं है, बल्कि यहां का कठिन भौगोलिक क्षेत्र और मौसम भी बड़ी चुनौती रहे हैं। लंबे समय तक लद्दाख के लोगों को हाईकोर्ट से जुड़े मामलों के लिए जम्मू या श्रीनगर जाना पड़ता था। नई बेंच का उद्देश्य न्यायिक सेवाओं को लोगों के अधिक करीब लाना है।
पूरी तरह IT-enabled और Paperless होगी व्यवस्था
लद्दाख बेंच को डिजिटल तकनीक से लैस करने पर विशेष जोर दिया गया है। Paperless व्यवस्था में अदालत के दस्तावेज, केस रिकॉर्ड और अन्य जरूरी जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा। इससे कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी और मामलों से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से देखने और इस्तेमाल करने में सुविधा मिलेगी।
देशभर में e-Courts Mission Mode Project के Phase III के तहत भी अदालतों को Digital और Paperless बनाने पर काम चल रहा है। इस चरण के लिए ₹7,210 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करना, e-filing, Video Conferencing, Online सेवाओं और AI जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाना शामिल है।
लद्दाख के लोगों के लिए क्यों अहम है यह बेंच?
लद्दाख की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को न्याय तक पहुंच बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद यहां स्थायी हाईकोर्ट बेंच की व्यवस्था की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसके लिए राष्ट्रपति द्वारा 27 अगस्त 2026 को जारी Regulation को 5 सितंबर 2026 से प्रभावी किया गया था।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि लद्दाख को अलग हाईकोर्ट नहीं मिला है। यह बेंच जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का ही हिस्सा है। इसका उद्देश्य लद्दाख के लोगों को High Court से जुड़ी न्यायिक सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है।
देशभर में बढ़ रहा Digital Courts का दायरा
भारत में अदालतों को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया पहले से जारी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, e-Courts Phase III के तहत 4,519 अदालतों में e-filing की सुविधा लागू की जा चुकी है और 7,553 न्यायिक प्रतिष्ठानों में Video Conferencing की सुविधा उपलब्ध है। वहीं 753.60 करोड़ पेज के न्यायिक रिकॉर्ड को डिजिटल किया जा चुका है।
Supreme Court के e-Committee के अनुसार Digital Courts के जरिए जज Case Files, Chargesheets, Orders और अन्य दस्तावेज डिजिटल रूप से देख सकते हैं। इसमें Voice-to-Text और कई भाषाओं में फैसलों के अनुवाद जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
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