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Manipur News: मणिपुर में फिर बढ़ी सियासी और सुरक्षा हलचल, नागा संगठनों ने पीएम मोदी से मांगा हस्तक्षेप

Manipur News: Political and Security Activity Intensifies Again in Manipur; Naga Organizations Seek PM Modi's Intervention

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Manipur में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक और सुरक्षा हालात एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। राज्य में जारी जातीय तनाव, हथियारों की बरामदगी और नागा-कुकी विवाद के बीच राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में राज्य की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, हिंसा प्रभावित इलाकों की स्थिति और विकास कार्यों की समीक्षा की गई।

मणिपुर पिछले कई महीनों से जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। मई 2023 से शुरू हुई हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों परिवार विस्थापित होकर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। राज्य में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।

इसी बीच नागा समुदाय के संगठनों ने भी केंद्र सरकार के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। तीन प्रमुख नागा सिविल सोसायटी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर “व्यक्तिगत और तत्काल हस्तक्षेप” की मांग की है। इन संगठनों ने आरोप लगाया कि पहाड़ी जिलों में नागा गांवों के खिलाफ हिंसा और क्षेत्रीय अतिक्रमण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

नागा संगठनों ने केंद्र सरकार से Suspension of Operations (SoO) समझौते के तहत सक्रिय कुकी उग्रवादी समूहों पर सख्त नियंत्रण लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राज्य में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

नागा संगठनों ने शांति प्रक्रिया तेज करने की मांग उठाई

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में नागा संगठनों ने भारत सरकार और National Socialist Council of Nagalim यानी NSCN (IM) के बीच हुए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को जल्द लागू करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि इंडो-नागा शांति प्रक्रिया को गति देकर ही राज्य में स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि नागा समुदाय लंबे समय से सम्मानजनक और समावेशी राजनीतिक समाधान की मांग कर रहा है। पत्र में यह भी कहा गया कि वर्तमान हालात केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय पहचान, अधिकार और सामाजिक संतुलन से जुड़ा गंभीर विषय है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मणिपुर में जातीय और क्षेत्रीय मुद्दे प्रमुख चुनावी विषय बन सकते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की भूमिका और फैसलों पर पूरे पूर्वोत्तर की नजर बनी हुई है।

सुरक्षा बलों ने तेज किए सर्च ऑपरेशन

राज्य में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने तलाशी अभियान और तेज कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार इंफाल वेस्ट जिले में चलाए गए दो अलग-अलग अभियानों में करीब 20 हथियार और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया है। लांगोल हिल रेंज क्षेत्र से 16 हथियार जब्त किए गए, जिनमें दस पिस्तौल, एक INSAS राइफल और .303 राइफल शामिल हैं। वहीं सेकमाई थाना क्षेत्र के इंगेल हिल इलाके से दो पिस्तौल, दो हैंड ग्रेनेड और अन्य हथियार बरामद किए गए।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि राज्य में अवैध हथियारों की मौजूदगी हिंसा को लगातार बढ़ावा दे रही है। इसी वजह से सेना, असम राइफल्स और राज्य पुलिस संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चला रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक मणिपुर में शांति बहाली के लिए केवल सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं, बल्कि राजनीतिक संवाद और सामाजिक विश्वास बहाली भी बेहद जरूरी है। फिलहाल राज्य में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और केंद्र सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

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Team The Loktantra

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