द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अक्टूबर को समस्तीपुर के कर्पूरी ग्राम से प्रचार का आगाज़ करेंगे। पीएम मोदी सबसे पहले जननायक और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के पैतृक गांव पहुंचेंगे, जहां उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वे दुधपुरा हवाई अड्डा मैदान में आयोजित विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे। कर्पूरी ग्राम में प्रधानमंत्री के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए हेलीपैड निर्माण का काम पहले ही शुरू कर दिया गया है।
पीएम मोदी बतायेंगे – असली जननायक कौन?
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि कर्पूरी ग्राम का चुनाव इस लिए किया गया है ताकि पीएम मोदी बिहार और पूरे देश को संदेश दें कि असली जननायक कौन है। पार्टी की रणनीति के अनुसार, यह कदम विशेष रूप से उन नेताओं के खिलाफ प्रतीकात्मक है जिन्हें उनके समर्थक ‘जननायक’ कहते हैं जिनमें राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव शामिल हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कई जगह इन नेताओं के लिए बैनर और पोस्टरों में ‘जननायक’ शब्द का प्रयोग देखा गया।
बीजेपी का मानना है कि कर्पूरी ठाकुर का पैतृक गांव प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को और प्रभावशाली बनाएगा। स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक और दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर की जनता में लोकप्रियता के चलते उन्हें ‘जननायक’ कहा जाता है। मोदी के इस दौरे से यह भी साफ संदेश जाएगा कि एनडीए कुनबा ही पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों का असली हितैषी है।
रैली के ज़रिए पिछड़ा-अति पिछड़ा वोट बैंक साधने की कोशिश
बीजेपी का चुनावी रणनीति यह भी है कि कर्पूरी ग्राम रैली के जरिए जातीय समीकरण और पिछड़ा-अति पिछड़ा वोट बैंक साधा जाए। एनडीए ने पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के लिए टिकट बंटवारे में भी संतुलन साधा है। पीएम मोदी के दौरे के साथ यह अभियान साफ करेगा कि आने वाला बिहार जननायक कर्पूरी ठाकुर के आदर्श और सपनों के अनुरूप होगा।
केंद्र सरकार ने हाल ही में मरणोपरांत कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित किया। इसके अलावा, नीतीश कुमार की सलाह पर कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर को केंद्रीय मंत्री बनाया गया है। इन सब कदमों के जरिए बीजेपी यह संदेश दे रही है कि एनडीए ही बिहार के पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों के असली हितैषी हैं।
इस रैली के बाद बिहार की सियासी हलचल और तेज होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्पूरी ग्राम से प्रचार शुरू करने का यह कदम केवल चुनावी रैली नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और जननायक के सपनों का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है।

