द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। ऐसे समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार और ऊर्जा कंपनियां सक्रिय कदम उठा रही हैं। इसी कड़ी में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने घोषणा की है कि वह गुजरात के जामनगर स्थित अपने रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स से एलपीजी (LPG) उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। जामनगर रिफाइनरी दुनिया का सबसे बड़ा एकीकृत रिफाइनिंग हब माना जाता है।
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि उसकी टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं ताकि रिफाइनरी संचालन को बेहतर बनाते हुए एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा सके और घरेलू बाजार में गैस की आपूर्ति स्थिर और भरोसेमंद बनी रहे। रिलायंस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सरकार की सभी राष्ट्रीय नीतियों और दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करते हुए देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कंपनी के अनुसार, केजी-डी6 बेसिन से निकलने वाली प्राकृतिक गैस को भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की आपूर्ति के लिए डायवर्ट किया जाएगा, जिससे घरेलू गैस वितरण व्यवस्था को मजबूती मिल सके। रिलायंस ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और करोड़ों परिवारों की जरूरतें उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।
सरकार ने लागू किया Essential Commodities Act, घरेलू गैस आपूर्ति को प्राथमिकता
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधान को देखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत विशेष कदम उठाए हैं। सरकार ने सभी तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और महत्वपूर्ण हाइड्रोकार्बन संसाधनों को एलपीजी पूल में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार के आदेश के अनुसार कुछ प्रमुख क्षेत्रों को प्राकृतिक गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), परिवहन क्षेत्र के लिए सीएनजी (CNG), एलपीजी उत्पादन, गैस पाइपलाइन संचालन और अन्य आवश्यक सेवाएं शामिल हैं। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर लगभग 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा उर्वरक उद्योग को उसकी औसत खपत का लगभग 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। वहीं चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक इकाइयों को राष्ट्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से लगभग 80 प्रतिशत गैस आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने 25 दिन का इंटर-बुकिंग अंतराल भी लागू किया है
तेल रिफाइनिंग कंपनियों को एलएनजी आपूर्ति में संभावित बाधा को देखते हुए गैस खपत को घटाकर लगभग 65 प्रतिशत तक सीमित करने को कहा गया है, ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके। साथ ही सभी गैस उत्पादकों, आयातकों, परिवहनकर्ताओं और विपणन कंपनियों को उत्पादन, आयात, भंडारण और वितरण से जुड़ी जानकारी केंद्र सरकार को नियमित रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी के साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन का इंटर-बुकिंग अंतराल भी लागू किया है। इसका उद्देश्य गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है। सरकार और निजी क्षेत्र की कंपनियों के इन कदमों का मुख्य लक्ष्य यही है कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत में घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे और आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

