द लोकतंत्र/ केरल डेस्क : केरल की राजनीति में सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोना चोरी मामले ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शनिवार को बड़ा बयान देते हुए इसे केवल चोरी नहीं बल्कि ‘धार्मिक अपवित्रता’ करार दिया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्र सरकार से स्वतंत्र केंद्रीय जांच की मांग की है। राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट ने शुरू से ही भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि कर दी है और यह साफ हो गया है कि मामला बेहद गंभीर है।
‘सरकारी और देवस्वोम स्तर पर गहरी मिलीभगत’ का आरोप
राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि प्रभामंडलम, शिव और व्याली रूपम से सोना हटाया जाना कोई साधारण चूक नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि द्वारपालक मूर्तियों से लगभग 4.5 किलोग्राम सोना हटाया गया, जो बिना अधिकृत पहुंच और उच्च स्तर की मिलीभगत के संभव नहीं है।
उनका दावा है कि प्रभामंडलम श्रीकोविल के भीतर स्थित है और वहां तक पहुंचना तथा वहां से सोना निकालना तभी संभव है जब संस्थागत सहयोग और संरक्षण हो। उन्होंने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा इस घटना को “एक चूक” बताए जाने को खारिज करते हुए कहा कि यह बयान मामले की गंभीरता को कम करके दिखाने का प्रयास है।
कांग्रेस और CPI(M) पर राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप
भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस मामले के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के कांग्रेस और CPI(M) नेताओं से संबंध सामने आए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि दशकों से देवस्वोम बोर्डों पर शासन करने वाली सरकारों ने राजनीतिक संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और CPI(M), जो INDIA गठबंधन के साझेदार हैं, ने देवस्वोम बोर्डों को ‘भ्रष्ट दलालों के संगठनों’ में बदल दिया है।
राजीव चंद्रशेखर का कहना है कि जिस SIT की रिपोर्ट उसी राजनीतिक नेतृत्व को सौंपनी हो, वह पूरे सच को सामने नहीं ला सकती। उनके अनुसार, केवल एक स्वतंत्र केंद्रीय जांच ही इस मामले में सच्चाई उजागर कर सकती है।
‘अयप्पा’ भक्तों को न्याय दिलाने का संकल्प
राजीव चंद्रशेखर ने साफ कहा कि भाजपा इस मामले को दबने नहीं देगी और “अयप्पा भक्तों को न्याय” दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। भाजपा का मानना है कि जब तक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी।
राजनीतिक घमासान और सड़क पर प्रदर्शन
इस विवाद ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। हाल ही में UDF संयोजक और कांग्रेस सांसद अदूर प्रकाश ने उन्नीकृष्णन पोट्टी से अपने संबंधों को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि पोट्टी उनके संसदीय क्षेत्र से हैं और सांसद होने के नाते वह उन्हें कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के आवास तक साथ ले गए थे, इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है। हालांकि, भाजपा इस सफाई से संतुष्ट नहीं दिख रही है।
विवाद का असर सड़कों पर भी देखने को मिला। इसी सप्ताह यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तिरुवनंतपुरम में जांच में देरी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया, जिसे पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल कर तितर-बितर किया। इससे मामला और अधिक राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है।
सबरीमाला सोना विवाद की पृष्ठभूमि
सबरीमाला सोना विवाद वर्ष 1998 में उद्योगपति विजय माल्या द्वारा दिए गए 30.3 किलोग्राम सोने और 1,900 किलोग्राम तांबे के दान से जुड़े सोना मढ़ाई कार्य में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। SIT ने इस मामले में उन्नीकृष्णन पोट्टी और हाल ही में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य विजयकुमार को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने केरल हाईकोर्ट में रिपोर्ट दाखिल कर गंभीर प्रक्रियागत खामियों की ओर भी इशारा किया है।
कुल मिलाकर, सबरीमाला सोना चोरी मामला अब केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह केरल की राजनीति, आस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। भाजपा की केंद्रीय जांच की मांग और विपक्ष के जवाबों के बीच आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होने की संभावना है।

