द लोकतंत्र/ पॉलिटिकल डेस्क : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार को गुजरात के ऐतिहासिक Somnath Temple में दर्शन-पूजन किया। भगवान शिव के 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले इस पवित्र धाम में प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। पीएम मोदी यहां 8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने पहुंचे, जो भारत के गौरवशाली इतिहास और हजार वर्षों की आस्था को समर्पित है।
प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में 72 घंटे तक चलने वाले ‘ॐ’ मंत्रोच्चार कार्यक्रम में सहभागिता की और भगवान सोमनाथ से देशवासियों के कल्याण की कामना की। इस अवसर को उन्होंने अपने लिए आध्यात्मिक रूप से अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण बताया।
सोमनाथ हमारी सभ्यतागत चेतना का जीवंत प्रतीक
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि सोमनाथ आकर वे स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थल भारत की सभ्यतागत साहस और आत्मगौरव का प्रतीक है। पीएम मोदी ने लिखा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान पूरा देश एकजुट होकर वर्ष 1026 में मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने को स्मरण कर रहा है। उन्होंने लोगों द्वारा दिए गए स्नेह और स्वागत के लिए आभार भी जताया।
प्रधानमंत्री ने एक अन्य संदेश में कहा, जय सोमनाथ! आज का स्वागत अत्यंत विशेष और अविस्मरणीय रहा।
11 जनवरी को शौर्य यात्रा और जनसभा
प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को सुबह लगभग 9:45 बजे शौर्य यात्रा में भाग लेंगे। यह यात्रा उन वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि देने के लिए निकाली जाएगी, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इस यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक मार्च होगा, जो शौर्य, बलिदान और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद प्रधानमंत्री मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन करेंगे और लगभग 11 बजे एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।
हजार वर्षों का इतिहास, आस्था और पुनर्निर्माण की कहानी
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व वर्ष 1026 में महमूद गजनवी द्वारा किए गए पहले आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया जा रहा है। इसके बाद सदियों तक यह मंदिर बार-बार ध्वस्त हुआ, लेकिन हर बार और अधिक गौरव के साथ पुनर्निर्मित हुआ। यह चक्र विश्व इतिहास में अद्वितीय है और यह दर्शाता है कि सोमनाथ केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि आस्था, पहचान और राष्ट्र के आत्मसम्मान का प्रतीक है।
सरदार पटेल से लेकर आज तक गौरव की परंपरा
12 नवंबर 1947 को Sardar Vallabhbhai Patel ने सोमनाथ के खंडहरों का दर्शन कर इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। जनसहयोग से बने इस मंदिर का 11 मई 1951 को उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने किया था। वर्ष 2026 इस ऐतिहासिक पुनर्प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने का भी साक्षी है।
आस्था, संस्कृति और आधुनिक विकास का संगम
अरब सागर के तट पर स्थित 150 फीट ऊंचे शिखर वाला सोमनाथ मंदिर आज भी सक्रिय पूजा स्थल है। हर साल यहां 90 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। लाइट एंड साउंड शो, वंदे सोमनाथ कला महोत्सव और विरासत संरक्षण जैसे प्रयासों ने इसे आध्यात्मिक के साथ सांस्कृतिक केंद्र भी बना दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी, जो श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, के नेतृत्व में मंदिर परिसर में आधारभूत ढांचे, प्रशासनिक सुधार और विरासत संरक्षण के कार्यों को नई गति मिली है। सोमनाथ आज न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि भारत की जीवंत सभ्यता और अडिग संकल्प का प्रतीक बन चुका है।

