द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिका के हिंद-प्रशांत कमान (INDO-PACOM) के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पपारो ने भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की खुलकर प्रशंसा की है। नई दिल्ली दौरे पर पहुंचे एडमिरल पपारो ने कहा कि इस अभियान ने भारत की सैन्य क्षमता, रणनीतिक सटीकता और संयम का प्रभावशाली उदाहरण पेश किया। उन्होंने माना कि ऐसे अभियानों में संयम और सटीक निष्पादन बेहद महत्वपूर्ण होता है, और भारत ने यह दिखाया कि शक्ति और शांति साथ-साथ चल सकती हैं।
पपारो ने यह भी संकेत दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती आक्रामक गतिविधियों और दबाव की रणनीतियों के बीच भारत-अमेरिका की साझेदारी और अधिक प्रासंगिक हो जाती है। उनके अनुसार दोनों देशों के साझा हित समुद्री सुरक्षा, संप्रभुता की रक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की रक्षा साझेदारी का निवारक (डिटरेंस) प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि अप्रैल 2025 के उस आतंकी हमले से जुड़ी है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को सटीक और सीमित सैन्य कार्रवाई की। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। बताया गया कि इस ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक, ड्रोन, मिसाइल और सटीक हवाई हमलों का उपयोग किया गया, जबकि नागरिक और सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान से बचाया गया।
चार दिनों तक चले इस अभियान में कई आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया और बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया गया। भारत ने इसे आतंकवाद के खिलाफ लक्षित और संतुलित कार्रवाई बताया। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञों ने भी इसे भारत की एयर सुपीरियरिटी और तकनीकी बढ़त का संकेत माना।
एडमिरल पपारो ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि ऐसे अभियानों के बाद आत्ममंथन और सीखने की प्रक्रिया भी उतनी ही अहम होती है। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी की मारक क्षमता और आधुनिक ‘किल चेन’ सिस्टम के इस्तेमाल से जुड़े अनुभव भविष्य की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान से स्पष्ट होता है कि ऑपरेशन सिंदूर ने वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य साख को मजबूती दी है। साथ ही, यह भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के नए अध्याय की ओर संकेत करता है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन और स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।

