द लोकतंत्र : भारतीय सिनेमा में जब भी देशभक्ति की बात होती है, तो जवानों का साहस और सीमा पर उनके बलिदान की कहानियां दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देती हैं। वर्तमान में बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बॉर्डर 2’ को लेकर बने व्यापक उत्साह के बीच ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर पुरानी सैन्य फिल्मों की व्यूअरशिप में अभूतपूर्व उछाल देखा जा रहा है। सिनेमा समीक्षकों का मानना है कि ये फिल्में मात्र मनोरंजन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए राष्ट्रीय गौरव का दस्तावेज हैं। आइए विश्लेषण करते हैं उन 7 प्रमुख फिल्मों का, जो डिजिटल स्पेस में पुनः लोकप्रियता के कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और युद्ध रणनीति: बॉर्डर एवं LOC कारगिल
जे.पी. दत्ता द्वारा निर्देशित फिल्में भारतीय युद्ध सिनेमा के लिए आधारस्तंभ मानी जाती हैं।
- बॉर्डर (1997): 1971 के लौंगेवाला युद्ध पर आधारित यह फिल्म आज भी देशभक्ति का सर्वोच्च मानक है। अमेजन प्राइम वीडियो पर इसकी मौजूदगी ‘बॉर्डर 2’ के लिए एक भावनात्मक भूमिका तैयार कर रही है।
- LOC: कारगिल (2003): यह फिल्म 1999 के कारगिल विजय की रणनीतिक बारीकियों और जवानों की कुर्बानी को बड़े कैनवास पर प्रस्तुत करती है।
आधुनिक युद्ध कला और तकनीकी सटीकता: उरि एवं शेरशाह
नई सदी का सिनेमा सच्ची घटनाओं और तकनीकी उत्कृष्टता का मिश्रण है।
- उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक (2019): यह फिल्म ‘न्यू इंडिया’ की सैन्य सक्षमता का प्रतीक है। विक्की कौशल का अभिनय और निर्देशन की सटीकता ने इसे एक कल्ट क्लासिक बना दिया है।
- शेरशाह (2021): कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर आधारित यह फिल्म त्याग और वीरता का एक अद्भुत मिश्रण है। अमेजन प्राइम पर यह सर्वाधिक देखी जाने वाली सैन्य फिल्मों में से एक है।
रूपांतरण और विशेष भूमिकाएं: लक्ष्य, हॉलीडे एवं जब तक है जान
सेना केवल सीमा पर लड़ने का नाम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का भी नाम है।
- ‘लक्ष्य’ में ऋतिक रोशन का एक भटके हुए युवा से एक अनुशासित अधिकारी बनने का सफर युवाओं को आज भी प्रेरित करता है। वहीं, ‘हॉलीडे’ में स्लीपर सेल्स के खिलाफ इंटेलिजेंस ऑपरेशन को दिखाया गया है। शाहरुख खान की ‘जब तक है जान’ बम डिफ्यूजल स्क्वाड के मानसिक दबाव को खूबसूरती से उकेरती है।
निष्कर्षतः, देशभक्ति फिल्में दर्शकों में सामूहिक चेतना और राष्ट्रवाद की भावना को प्रज्वलित करने का सशक्त माध्यम हैं। ‘बॉर्डर 2’ की रिलीज से पूर्व इन फिल्मों का ओटीटी पर पुनः सक्रिय होना यह दर्शाता है कि वीरता की कहानियां कभी पुरानी नहीं होतीं। ये फिल्में न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि हमें उस स्वतंत्रता के मूल्य का बोध कराती हैं जिसके लिए हमारे जवान सीमा पर तत्पर हैं।

