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बिहार चुनाव 2025: पैसों के दुरुपयोग पर चुनाव आयोग सख्त, तीन दिन में 33.97 करोड़ की जब्ती

Bihar Elections 2025: Election Commission cracks down on misuse of money, seizes Rs 33.97 crore in three days

द लोकतंत्र/ पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तैयारियों का दौर तेज़ हो गया है। चुनाव आयोग ने पैसों के दुरुपयोग और मतदाताओं को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद केवल तीन दिनों में विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों ने कुल 33.97 करोड़ रुपए जब्त किए हैं, जिसमें नकदी, शराब, ड्रग्स और मुफ्त सामान शामिल हैं।

चुनाव आयोग ने बताया कि अपने दौरे के दौरान वे उड़न दस्ते, निगरानी दल और वीडियो निगरानी टीमों से मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी उम्मीदवार द्वारा धनबल या प्रलोभनों का इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए न किया जाए। आयोग की यह कार्रवाई चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

चुनाव दिलचस्प, सीट शेयरिंग के पेंच में फँसा है महागठबंधन

वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपना सीट-बंटवारा भी घोषित कर दिया है। भाजपा और जदयू को 101-101 सीटें मिली हैं, जबकि लोजपा (रामविलास) 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) छह-छह सीटों पर चुनाव मैदान में उतरेंगे। यह सीट बंटवारा एनडीए की चुनावी रणनीति और गठबंधन के भीतर संतुलन को दर्शाता है।

चुनाव में NDA का मुकाबला तेजस्वी यादव नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक, कांग्रेस, दीपांकर भट्टाचार्य की सीपीआई (एमएल), सीपीआई, सीपीएम और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) से होगा। हालाँकि, महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर अभी भी पेंच फँसा हुआ है। इस बार बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर और उनकी नई पार्टी जन सुराज पार्टी की एंट्री भी हुई है, जो चुनावी समीकरण को और दिलचस्प बना रही है। प्रशांत किशोर ने खुद घोषणा की है कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन पार्टी के लिए काम जारी रखेंगे, जिससे उनके प्रभाव और रणनीति पर ध्यान केंद्रित रहेगा।

चुनाव आयोग की सक्रिय निगरानी और NDA के सीट बंटवारे के साथ ही बिहार चुनाव की रणनीति और मुकाबला काफी रोमांचक और चुनौतीपूर्ण बनने वाला है। पैसों के दुरुपयोग पर रोक, नए गठबंधनों और नेताओं की भागीदारी से यह चुनाव न केवल राजनीतिक दृष्टि से बल्कि जन प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित होगा। मतदाता और उम्मीदवार दोनों के लिए यह समय महत्वपूर्ण है, और आयोग की सख्ती यह सुनिश्चित करेगी कि बिहार चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो।

Team The Loktantra

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