द लोकतंत्र/ पटना : बिहार की सियासत में बड़ा दिलचस्प मोड़ आया है। जनसुराज पार्टी ने तेजस्वी यादव के गढ़ राघोपुर सीट से अपने प्रत्याशी के तौर पर चंचल सिंह का नाम घोषित कर दिया है। इस ऐलान के साथ ही साफ हो गया है कि जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) अब इस सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे।
यह फैसला उस बयान के ठीक उलट है, जिसमें प्रशांत किशोर ने कहा था कि तेजस्वी यादव को दो सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ेगा, राघोपुर अब अमेठी बन जाएगा। लेकिन अब ऐसा लगता है कि राघोपुर नहीं, बल्कि ‘पीके’ की रणनीति’ ही पलट गई है।
मैदान छोड़ भागे PK
दरअसल, लंबे समय से यह अटकलें थीं कि प्रशांत किशोर बिहार विधानसभा चुनाव में खुद मैदान में उतरेंगे। चर्चाएं इस बात की थीं कि वे या तो वैशाली जिले की राघोपुर सीट से या फिर रोहतास की करगहर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन अब जनसुराज पार्टी ने इन दोनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। यानी अब यह लगभग तय है कि प्रशांत किशोर इस चुनाव में उम्मीदवार के रूप में नहीं उतरने वाले हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर खूब चर्चा है। विपक्षी दलों के समर्थक इस फैसले को लेकर प्रशांत किशोर पर तंज कस रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने लिखा कि जो राघोपुर को अमेठी कह रहे थे, वही अब रण छोड़ गए! वहीं कुछ लोग इसे रणनीतिक बैकफुट बता रहे हैं, जो जनसुराज के मिशन को कमजोर कर सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि जनसुराज के नेता खुद बार-बार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि उनकी लड़ाई ‘व्यक्तिगत राजनीति नहीं, वैचारिक परिवर्तन’ की है। लेकिन पीके के समर्थकों को उम्मीद थी कि वह तेजस्वी यादव के खिलाफ सीधे मोर्चा खोलेंगे और राघोपुर को एक हाई-वोल्टेज मुकाबला बना देंगे। अब जब जनसुराज ने वहां चंचल सिंह को मैदान में उतारा है, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या ‘रणनीतिकार’ खुद रणनीति से बाहर हो गए हैं?’

