द लोकतंत्र : धार्मिक स्थलों में छिपे रहस्य आज भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बिहार के बक्सर जिले में स्थित राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर एक ऐसा ही रहस्यमयी स्थल है, जहां आधी रात को मंदिर में स्थापित मूर्तियों के बीच बातचीत की आवाज सुनी जाती है।
मंदिर का रहस्य और परंपरा
बक्सर के डुमरांव नगर के लाला टोली मोहल्ला में स्थित इस तांत्रिक मंदिर में कभी भी कलश स्थापना नहीं की जाती। यहां तक कि शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान भी कलश स्थापित नहीं किया जाता। मंदिर तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है और साधकों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने में यह विशेष माना जाता है।
मंदिर में मुख्य रूप से राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की मूर्ति स्थापित है, इसके अलावा मां बगलामुखी, तारा देवी और पांचों भैरव की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। बक्सर के इस मंदिर में काली, त्रिपुर भैरवी, धुमावती, तारा, छिन्नमस्तिका, षोड़सी, मातंगड़ी, कमला, उग्र तारा और भुवनेश्वरी समेत दस महाविद्याएं भी प्रतिष्ठित हैं।
मंदिर का 400 साल पुराना इतिहास
राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर की स्थापना 400 साल पहले तांत्रिक भवानी मिश्र द्वारा की गई थी। तब से लेकर आज तक उनके परिवार के सदस्य ही मंदिर में पुजारी की भूमिका निभा रहे हैं। पुजारी बताते हैं कि मंदिर में मां बगलामुखी और राज राजेश्वरी को सूखे मेवे का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
मूर्तियों की आधी रात की बातचीत
मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि आधी रात में मूर्तियों के बीच बातचीत की आवाज आती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि आधी रात के समय मंदिर में ऐसा लगता है जैसे दो लोग आपस में बातचीत कर रहे हों। यह घटना न केवल श्रद्धालुओं के लिए रहस्यपूर्ण है बल्कि वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं के लिए भी उत्सुकता का विषय बनी हुई है।
श्रद्धा और आस्था का केंद्र
राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में भक्तजन अपनी मनोकामनाओं के पूर्ति और तांत्रिक साधनाओं के लिए आते हैं। मंदिर की यह अनोखी परंपरा और आधी रात की रहस्यमयी बातचीत इसे बिहार का विशेष धार्मिक स्थल बनाती है।
इस मंदिर की कहानी केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और रहस्यमयी दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। श्रद्धालु और पर्यटक दोनों ही इस मंदिर की अनूठी परंपरा को देखने और अनुभव करने के लिए यहां आते हैं।

