द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। इसके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की भी आराधना की जाती है।
धनतेरस पर घरों और दफ्तरों में लक्ष्मी-कुबेर पूजन की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस दिन नए बर्तन, सोना, चांदी और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना शुभ माना जाता है।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त (Dhanteras 2025 Puja Muhurat):
इस वर्ष धनतेरस 18 अक्टूबर 2025, शनिवार को मनाई जाएगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 7:11 बजे से रात 9:22 बजे तक
अवधि: 2 घंटे 12 मिनट
इस समय माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर महाराज की पूजा करने से घर में धन-धान्य और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है।
दिवाली 2025 पूजा मुहूर्त (Diwali 2025 Puja Muhurat):
दिवाली का पर्व 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाया जाएगा। यह अमावस्या तिथि होती है, और इस दिन प्रदोष काल में पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
प्रदोष काल: शाम 5:46 से रात 8:18 बजे तक
लक्ष्मी-गणेश पूजन मुहूर्त: शाम 7:08 बजे से रात 8:18 बजे तक
इस समय में पूजा करने से माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि लाती हैं।
कार्यालय में पूजा का विशेष महत्व:
आजकल केवल घरों में ही नहीं, बल्कि कॉरपोरेट ऑफिसों में भी दिवाली और धनतेरस पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन ऑफिस में पूजा करने से व्यापार में वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
पूजा विधि (Puja Vidhi):
सबसे पहले घर या ऑफिस की साफ-सफाई करें।
पूजा स्थल पर लाल या पीले कपड़े का आसन बिछाएं।
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें और दीपक जलाएं।
पूजा में हल्दी, चावल, फूल, मिठाई और अक्षत का प्रयोग करें।
लक्ष्मी मंत्र या श्रीसूक्त का पाठ करें।
धनतेरस और दिवाली का महत्व:
धनतेरस को धन का प्रतीक और दिवाली को प्रकाश का प्रतीक* माना गया है। दोनों ही त्योहार मिलकर जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

