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मंगलवार को वर्जित हैं ये 5 कार्य; हनुमान जी की कृपा के लिए अपनाएं ये Astrology नियम

The loktnatra

द लोकतंत्र : सनातन धर्म में मंगलवार का दिन शक्ति, साहस और संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है। मान्यता है कि हनुमान जी कलयुग के एकमात्र ऐसे देवता हैं, जो अपने भक्तों की पुकार पर तत्काल सहायता करते हैं। किंतु, बजरंगबली की भक्ति जितनी सहज है, उतनी ही अनुशासन की अपेक्षा रखती है। ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक ग्रंथों में मंगलवार के दिन किए जाने वाले कार्यों को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गये हैं। इन नियमों का उल्लंघन न केवल आध्यात्मिक अवरोध पैदा करता है, अपितु कुंडली में स्थित ‘मंगल’ ग्रह को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

मंगलवार के दिन किए गए अनुचित कार्य जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बाधाएं उत्पन्न कर सकते हैं।

  • शारीरिक स्वच्छता के नियम: इस दिन बाल कटवाना अथवा नाखून काटना शास्त्रों में वर्जित है। माना जाता है कि ऐसा करने से आयु क्षय होती है और मंगल ग्रह की ऊर्जा कमजोर पड़ती है, जिससे व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • वित्तीय लेनदेन में सावधानी: मंगलवार को उधार लेना अथवा देना, दोनों ही अशुभ माने जाते हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि इस दिन लिया गया ऋण चुकाते समय अनेक व्यवधान आते हैं और यह आर्थिक अस्थिरता का कारण बनता है।
  • आहार शुद्धि: मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन इस दिन महापाप के तुल्य माना गया है। यह न केवल हनुमान जी को नाराज करता है, बल्कि दांपत्य जीवन में कलह और मानसिक अशांति को बढ़ावा देता है।
  • वस्तुओं की खरीददारी: चाकू, कैंची अथवा अन्य धारदार सामान खरीदने से परिवार में विवाद की संभावना प्रबल होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लोहे के नुकीले सामान का संबंध शनि और मंगल के क्रूर प्रभावों से हो सकता है।
  • शेयर बाजार अथवा भूमि संपत्ति में निवेश करने के लिए मंगलवार को आदर्श नहीं माना जाता। गवर्नर और वित्तीय ज्योतिषी अक्सर परामर्श देते हैं कि नई योजनाओं की शुरुआत अथवा बड़ा पूंजी निवेश इस दिन टालना चाहिए, क्योंकि यह अत्यधिक जोखिम और हानि का संकेत देता है।

आधुनिक युग में भी इन परंपराओं की प्रासंगिकता बनी हुई है। हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग है कि हम अपने दैनिक आचरण को सात्विक रखें और शास्त्रों द्वारा निर्धारित मर्यादाओं का पालन करें।

निष्कर्षतः, मंगलवार का दिन आत्म-संयम और समर्पण का है। इन वर्जनाओं का पालन करके हम न केवल हनुमान जी को प्रसन्न कर सकते हैं, बल्कि अपने जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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