द लोकतंत्र : उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ के कण-कण में महादेव बसते हैं। काशी के इन्हीं घाटों के बीच स्थित है ‘मणिकर्णिका घाट’, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा महाश्मशान और मोक्षदायिनी घाट माना जाता है। आमतौर पर लोग मंदिरों में अपनी मुरादें पूरी करने जाते हैं, लेकिन मणिकर्णिका वह स्थान है जहाँ लोग इच्छा-पूर्ति नहीं, बल्कि शांति और मोक्ष की तलाश में आते हैं।
यहाँ मृत्यु भी है मंगलकारी
काशी खंड के पुराणों में मणिकर्णिका घाट की महिमा का विस्तार से वर्णन है। एक मशहूर श्लोक है— ‘मरणं मंगलं यत्र’, जिसका अर्थ है कि काशी में मृत्यु होना भी मंगलकारी है। माना जाता है कि जो व्यक्ति यहाँ अपने प्राण त्यागता है या जिसका अंतिम संस्कार यहाँ की पवित्र अग्नि में होता है, वह जन्म-मरण के चक्र से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है। यही कारण है कि देश के कोने-कोने से लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने यहाँ पहुँचते हैं।
कभी नहीं बुझती यहाँ की ‘अखंड अग्नि’
मणिकर्णिका घाट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ की चिता की अग्नि कभी नहीं बुझती। 24 घंटे और 365 दिन यहाँ शवों का दाह संस्कार होता रहता है। इसे ‘अखंड अग्नि’ कहा जाता है, जो जीवन की नश्वरता और मृत्यु के अटल सत्य को दर्शाती है।
मणिकर्णिका नाम के पीछे का रहस्य
इस घाट के नाम के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि यहाँ माता सती के कान की मणि (मणिकर्ण) गिरी थी, जिसके कारण इसका नाम ‘मणिकर्णिका’ पड़ा। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस घाट को माता पार्वती का श्राप लगा है, जिसकी वजह से यहाँ चिताएं कभी शांत नहीं होतीं और श्मशान की आग हमेशा जलती रहती है।
क्यों चर्चा में है मणिकर्णिका? (Manikarnika Ghat Controversy)
पिछले कुछ दिनों से मणिकर्णिका घाट विकास और विवादों के केंद्र में है। यहाँ चल रहे नवीनीकरण और पुनर्विकास (Redevelopment) के काम को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए हैं।
विपक्ष और कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर प्राचीन मूर्तियों और ऐतिहासिक कलाकृतियों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि ये वीडियो फेक या AI जनरेटेड हो सकते हैं और इनका उद्देश्य भ्रम फैलाना है। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है, लेकिन इसने काशी की विरासत और आधुनिक विकास के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
मणिकर्णिका घाट केवल एक श्मशान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का वह अटूट हिस्सा है जो हमें सिखाता है कि अंत ही नई शुरुआत है। विकास जरूरी है, लेकिन काशी की प्राचीन रूह को बचाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है।

