द लोकतंत्र : मानव शरीर पर तिलों की उपस्थिति को लेकर आधुनिक विज्ञान और प्राचीन हिंदू धर्म शास्त्रों के दृष्टिकोण परस्पर भिन्न हैं। जहाँ चिकित्सा विज्ञान (Dermatology) तिलों को त्वचा की कोशिकाओं (Melanocytes) के संकेंद्रण या खराब कोशिकाओं का परिणाम मानता है, वहीं प्राचीन भारतीय विधा ‘सामुद्रिक शास्त्र’ इन्हें व्यक्ति के भाग्य, स्वभाव और भविष्य का सूचक मानती है। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, शरीर के किसी भी अंग पर स्थित तिल अकारण नहीं होता; वह व्यक्ति के आगामी जीवन की घटनाओं का संकेत देता है। विशेष रूप से ‘पेट पर तिल’ होना एक अत्यंत प्रभावशाली लक्षण माना गया है, जो धन, सफलता और पारिवारिक सुख से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है।
स्त्री-पुरुष भेद: पेट पर तिल और सामाजिक प्रभाव
सामुद्रिक शास्त्र के ऋषियों ने यह स्पष्ट किया है कि एक ही स्थान पर स्थित तिल का फल पुरुषों और महिलाओं के लिए भिन्न हो सकता है।
- पुरुषों के लिए समृद्धि का प्रतीक: पुरुषों के उदर (पेट) पर तिल होना उनके करियर और आर्थिक सुदृढ़ता की ओर संकेत करता है। ऐसे व्यक्तियों को व्यावसायिक क्षेत्र में उच्च पद और मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होने की संभावना अधिक रहती है। मान्यता है कि इनके जीवन में कभी भी भौतिक संसाधनों का अभाव नहीं होता।
- महिलाओं के लिए पारिवारिक वैभव: महिलाओं के पेट पर तिल होना उनके वैवाहिक जीवन की सफलता का परिचायक है। यह संतान सुख, पति का अटूट प्रेम और गृहस्थी में शांति का प्रतीक माना जाता है। ऐसी महिलाएं अपने कुल के लिए भाग्यशाली मानी जाती हैं।
स्थान विशेष का महत्व: दाईं बनाम बाईं ओर का तिल
तिल की स्थिति मात्र कुछ सेंटीमीटर बदलने से उसके फल में व्यापक परिवर्तन आ सकता है।
- दाईं ओर तिल (Right Side): पेट के दाईं ओर तिल होना ‘लक्ष्य संधान’ की शक्ति को दर्शाता है। ऐसे लोग अत्यंत दृढ़निश्चयी होते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अथक परिश्रम करते हैं। इनका व्यक्तित्व चुंबकीय होता है और ये धन संचय करने में निपुण होते हैं। इनका प्रेम जीवन भी स्थिरता और गहराई लिए होता है।
- बाईं ओर तिल (Left Side): इसके विपरीत, बाईं ओर तिल होने पर व्यक्ति को जीवन के प्रारंभिक काल में संघर्ष और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोग बहुभाषी या वाकपटु होते हैं। यद्यपि इन्हें संपत्ति का लाभ होता है, किंतु मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए इन्हें कठिन प्रयास करने पड़ते हैं।
स्वास्थ्य और जीवनशैली: एक आधुनिक विश्लेषण
- दिलचस्प तथ्य यह है कि सामुद्रिक शास्त्र तिलों को केवल भाग्य से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जोड़ता है। पेट पर तिल होने वाले व्यक्तियों के विषय में कहा जाता है कि इनका ‘पाचन तंत्र’ (Digestive System) संवेदनशील हो सकता है। ऐसे लोग भोजन के प्रति विशेष अभिरुचि रखते हैं और अक्सर ‘फूडी’ (Foodie) श्रेणी में आते हैं। ज्योतिषियों का सुझाव है कि इन्हें अपने खान-पान पर नियंत्रण रखना चाहिए ताकि स्वास्थ्य बाधाएं करियर में रुकावट न बनें।
निष्कर्षतः, सामुद्रिक शास्त्र तिलों को व्यक्ति के कर्म और प्रारब्ध का एक सूक्ष्म नक्शा मानता है। यद्यपि आधुनिक युग में इन धारणाओं को तार्किकता की कसौटी पर परखा जाता है, किंतु सदियों से चली आ रही यह विधा आज भी करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। पेट पर तिल होना निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है, बशर्ते व्यक्ति अपने संकल्प और पुरुषार्थ पर भरोसा रखे।

