Advertisement Carousel
Spiritual

Sneezing Signs: छींक आना हमेशा अशुभ नहीं होता! जानें कब छींक दिलाती है धन लाभ और कब बढ़ती है मुश्किल

The loktnatra

द लोकतंत्र : हम कहीं बाहर जा रहे हों और अचानक छींक आ जाए, तो अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग टोक देते हैं— “अरे! जरा रुक जाओ, पानी पीकर जाना।” हमारे समाज में छींक को लेकर कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं। लोग इसे तुरंत किसी अनहोनी या काम में रुकावट से जोड़ देते हैं।

हालांकि, विज्ञान कहता है कि यह शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन भारतीय ‘शकुन शास्त्र’ में छींक को भविष्य के संकेतों से जोड़ा गया है। दिलचस्प बात यह है कि हर छींक अशुभ नहीं होती; बल्कि कुछ खास परिस्थितियों में छींक आना बहुत शुभ और लाभकारी भी माना जाता है। आइए जानते हैं क्या कहता है शास्त्र।

कब छींक बढ़ा सकती है आपकी परेशानी? (अशुभ संकेत)

शकुन शास्त्र के अनुसार, कुछ स्थितियों में छींक आने का मतलब है कि आपके बनते काम बिगड़ सकते हैं:

  • घर से निकलते समय: अगर आप किसी जरूरी काम के लिए दहलीज पार कर रहे हैं और तभी सामने से कोई छींक दे, तो इसे काम में बाधा का संकेत माना जाता है। ऐसे में 2 मिनट रुककर, पानी पीकर ही आगे बढ़ना चाहिए।
  • रसोई में छींक: दूध उबालते समय यदि घर की महिला को छींक आ जाए, तो इसे परिवार में किसी सदस्य की बीमारी का संकेत माना जाता है।
  • बहस के दौरान: अगर दो लोगों के बीच झगड़ा या बहस चल रही हो और तभी छींक आ जाए, तो माना जाता है कि मामला और ज्यादा बिगड़ सकता है।
  • जानवरों की छींक: घर से निकलते समय कुत्ते की छींक सुनाई देना किसी अज्ञात डर या बड़ी विपत्ति की ओर इशारा करता है।

कब छींक बन जाती है ‘वरदान’? (शुभ संकेत)

हैरानी की बात है कि छींक हमेशा डराती नहीं, कभी-कभी खुशियां भी लाती है:

  • मांगलिक कार्य के समय: यदि आप किसी शुभ कार्य या पूजा-पाठ के लिए घर से निकल रहे हैं और आपको छींक आ जाए, तो इसे बहुत शुभ माना गया है। यह अचानक धन लाभ और काम में सफलता मिलने का इशारा है।
  • बीमारी और दवा: अगर कोई बीमार व्यक्ति दवा लेते समय छींकता है, तो इसका आध्यात्मिक अर्थ है कि वह बहुत जल्द ठीक होने वाला है।
  • खरीददारी के वक्त: बाजार में कोई नई चीज खरीदते समय छींक आना भविष्य में उस वस्तु से सुख और समृद्धि मिलने का संकेत है।

छींक की संख्या और दिशा का महत्व

शकुन शास्त्र में छींक की संख्या भी मायने रखती है। एक बार छींक आना अक्सर बाधा माना जाता है, लेकिन एक साथ दो या उससे ज्यादा बार छींक आना उस बाधा को खत्म करने का संकेत माना जाता है। इसी तरह, दाईं ओर से आई छींक को अक्सर शुभ और बाईं ओर की छींक को सामान्य माना गया है।

छींक को लेकर समाज में डराने वाली बातें ज्यादा हैं, लेकिन शास्त्र इसे सकारात्मक रूप में भी देखता है। इसलिए अगली बार जब छींक आए, तो घबराने के बजाय यह देखें कि उस वक्त परिस्थिति क्या थी।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

साधना के चार महीने
Spiritual

Chaturmas 2025: चार महीने की साधना, संयम और सात्विक जीवन का शुभ आरंभ

द लोकतंत्र: चातुर्मास 2025 की शुरुआत 6 जुलाई से हो चुकी है, और यह 1 नवंबर 2025 तक चलेगा। यह चार
SUN SET
Spiritual

संध्याकाल में न करें इन चीजों का लेन-देन, वरना लौट सकती हैं मां लक्ष्मी

द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में संध्याकाल यानी शाम का समय देवी लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। यह वक्त