द लोकतंत्र : प्राचीन भारतीय शास्त्रों और वास्तु शास्त्र में वृक्षों और पौधों को विशेष महत्व दिया गया है। जहाँ कुछ पौधे, जैसे तुलसी, घर में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लाते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी वृक्ष हैं जिनकी छाया भी घर पर पड़ना अशुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं और वास्तु नियमों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कुछ वृक्षों की ऊर्जा इतनी प्रबल होती है कि उनकी छाया यदि सीधे गृहस्वामी के आवास पर पड़े, तो यह बाधाएँ, धन हानि और मानसिक तनाव का कारण बन सकती है।
किन वृक्षों से रहना चाहिए सतर्क?
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, घर ही नहीं बल्कि घर के ठीक बाहर या सामने भी कुछ विशेष वृक्षों को लगाने से बचना चाहिए। इन वृक्षों से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है:
पीपल का पेड़ (Peepal Tree):
- धार्मिक महत्व: हिंदू धर्म में पीपल को पवित्र और पूजनीय माना गया है, जिसमें देवताओं का वास बताया जाता है।
- अशुभता का कारण: शास्त्रों के अनुसार, पीपल वृक्ष में पितरों का वास भी होता है। इसकी ऊर्जा भले ही आध्यात्मिक हो, लेकिन यह घर के भौतिक सुखों और पारिवारिक जीवन के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए पीपल को मंदिर, चौराहे या खुले स्थानों पर लगाना ही शुभ माना गया है, न कि घर के बिल्कुल करीब।
इमली का पेड़ (Tamarind Tree):
- मान्यता: इमली वृक्ष की छाया को शास्त्रों में भारी छाया कहा जाता है। बड़े-बुजुर्ग दिन ढलने के बाद इसके समीप जाने से मना करते हैं।
- अशुभता का कारण: ऐसा माना जाता है कि जिस घर पर इस वृक्ष की छाया पड़ती है, वहाँ के निवासियों में आलस्य, रोग और मानसिक तनाव की वृद्धि होती है। यह घर की ऊर्जा को अवसादग्रस्त बना सकता है।
बेल का पेड़ (Bel Tree):
- धार्मिक महत्व: बेल का वृक्ष भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय है और इसके फल व पत्ते अत्यंत पवित्र माने जाते हैं।
- अशुभता का कारण: वास्तु के अनुसार, बेल का वृक्ष काँटेदार भी होता है। घर पर काँटेदार वृक्ष को लगाना शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा, बेल के विशाल वृक्ष की छाया में एक प्रकार की उग्र ऊर्जा होती है, जो घर के शांत वातावरण और रिश्तों में मिठास को प्रभावित कर सकती है। इसे भी मंदिरों या खुले स्थान पर लगाना ही शुभ है।
अन्य वर्जित वृक्ष और समाधान
- पीपल, बेल, इमली के अतिरिक्त मदार, खजूर, मेहंदी, बेर और दूधिया या कांटेदार वृक्ष भी घर के लिए शुभ नहीं माने जाते हैं।
- यदि ये अशुभ वृक्ष पहले से ही घर या उसके आस-पास लगे हों, तो इन नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए ये उपाय किए जा सकते हैं:
- गंगाजल का छिड़काव: सप्ताह में एक बार घर पर गंगाजल का छिड़काव करें, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- तुलसी रोपण: घर के आंगन में तुलसी लगाएँ। तुलसी की उपस्थिति आस-पास के किसी भी नकारात्मक वृक्ष का प्रभाव स्वतः घटाती है।
- दीपक जलाना: सूर्यास्त के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक अवश्य जलाएँ।
- शाखाओं की छंटाई: यदि संभव हो, तो वृक्ष की शाखाओं को इस तरह कटाई करें कि उनकी छाया सीधे घर के अंदर या भवन पर न पड़े।
वास्तु शास्त्र का मूल सिद्धांत प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करना है। जिन वृक्षों को घर के समीप वर्जित बताया गया है, वे कहीं न कहीं अपने स्वभाव या ऊर्जा के कारण गृहस्थ जीवन की शांति को भंग करते हैं। इन सरल नियमों का पालन करके, व्यक्ति अपने घर को सकारात्मकता, सौभाग्य और स्थिरता का केंद्र बना सकता है।
Disclaimer: इस न्यूज में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। द लोकतंत्र इसकी पुष्टि नहीं करता है।

