द लोकतंत्र : तकनीकी जगत में AI ब्राउजर को लेकर तेज हो रहे मुकाबले के बीच, गूगल ने अपना नया एक्सपेरिमेंटल AI-फर्स्ट ब्राउजर ‘डिस्को’ (Disco) लॉन्च कर दिया है। यह उत्पाद सीधे तौर पर OpenAI के ChatGPT Atlas को टक्कर देने के लिए डिजाइन किया गया है। गूगल का दावा है कि डिस्को पारंपरिक ब्राउजरों में AI जोड़ने के बजाय, AI को ब्राउजर की बुनियाद (Foundation) बनाता है। यह उपयोगकर्ता की ब्राउजिंग गतिविधि के आधार पर स्वचालित रूप से कस्टम वेब ऐप्स तैयार करने की क्षमता रखता है।
Google Disco की बुनियादी खासियत
डिस्को को इस तरह से तैयार किया गया है कि AI ब्राउजर के हर पहलू में अंतर्निहित (Intrinsic) रहे। यह प्रयास OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन के उस बयान के जवाब में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने Atlas को Chrome के 17 साल के दबदबे का अंत कहा था।
- AI कोर में: ChatGPT Atlas जैसे ब्राउजर सिर्फ पारंपरिक वेब अनुभव के ऊपर एक AI लेयर जोड़ते हैं, जबकि Disco AI को शुरुआत से ही कोर में स्थापित करता है। यह ब्राउजर के काम करने के तरीके को ही पुनर्विचारित करता है।
GenTabs: डिस्को की सबसे बड़ी ताकत
Disco का सबसे नवीन (Innovative) फीचर GenTabs है, जो Google के शक्तिशाली Gemini 3 AI मॉडल पर आधारित है।
- कार्यप्रणाली: GenTabs खुले हुए टैब्स को एनालाइज़ करता है और उन्हें सीधे इंटरैक्टिव ऐप्स में बदल देता है।
उदाहरण:
- ट्रैवल रिसर्च: स्वचालित रूप से एक ट्रिप प्लानर तैयार हो जाता है, जिसमें मैप और आइटिनरी शामिल होती है।
- शैक्षणिक रिसर्च: यह विजुअल टूल्स और लर्निंग एड्स विकसित करता है।
- मील प्लानिंग: रेसिपी और शॉपिंग लिस्ट के साथ एक विशेष ऐप बन जाता है।
Disco में AI-जनरेटेड ऐप्स ही ब्राउजर का मुख्य हिस्सा हैं, जिन्हें यूजर नेचुरल लैंग्वेज कमांड से कस्टमाइज कर सकता है और सभी आउटपुट ओरिजिनल सोर्स से जुड़े रहते हैं।
बाजार की प्रतिस्पर्धा और भविष्य की अनिश्चितता
ChatGPT Atlas, Perplexity Comet और Microsoft Edge with Copilot जैसे ब्राउजर मुख्यतः AI चैट पैनल जोड़ने पर ध्यान देते हैं, लेकिन डिस्को इनसे एक कदम आगे निकल गया है।
गूगल ने फिलहाल डिस्को को macOS यूजर्स के लिए वेटलिस्ट के जरिए जारी किया है और इसे एक ‘डिस्कवरी व्हीकल’ बताया है। कंपनी का कहना है कि यहां टेस्ट किए गए विचारों को भविष्य में Chrome या अन्य उत्पादों में शामिल किया जा सकता है।
चूँकि गूगल लैब्स के कई प्रोजेक्ट्स पहले भी बंद हो चुके हैं, इसलिए डिस्को की लंबी उम्र पर सवाल बने हुए हैं। इसके बावजूद, यह स्पष्ट है कि ब्राउजर की जंग अब पूरी तरह से AI के आधार पर लड़ी जाएगी और गूगल इस प्रतिस्पर्धा को हलके में नहीं ले रहा है।

