द लोकतंत्र: शारदीय नवरात्रि का त्योहार पूरे देश में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है, और कई भक्त नौ दिनों का व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान खाए जाने वाले फलाहार में फल, आलू, दही के साथ-साथ सिंघाड़े और कुट्टू का आटा प्रमुखता से शामिल होता है। इन दोनों ही आटे को अगर सही तरीके से खाया जाए, तो ये हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।
आयुर्वेद के विशेषज्ञ बताते हैं कि कुट्टू और सिंघाड़े का आटा दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर और ग्लूटेन-फ्री होते हैं। ये दोनों शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं। आइए जानते हैं कि इन दोनों में क्या-क्या पोषक तत्व पाए जाते हैं और ये सेहत के लिए किस तरह फायदेमंद हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट: जानिए सिंघाड़े और कुट्टू के फायदे
आयुर्वेद एक्सपर्ट के अनुसार, सिंघाड़े और कुट्टू दोनों ही आटे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। इन दोनों को मिलाकर खाने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं। ये हमारे ब्लड वेसल्स और आर्टरीज़ के लिए भी अच्छे होते हैं, क्योंकि ये उन्हें संकरा होने से रोकते हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रहता है।
यहां एक टेबल में इन दोनों की न्यूट्रीशन वैल्यू की तुलना की गई है:
| कूट्टु का आटा | न्यूट्रीशन वैल्यू | सिंघाड़े का आटा | न्यूट्रीशन वैल्यू |
| कैलोरी | 343 | कैलोरी | 97 |
| पानी | 10% | प्रोटीन | 1 ग्राम |
| प्रोटीन | 13.3 ग्राम | फैट | 0 ग्राम |
| फैट | 3.4 ग्राम | कार्ब्स | 24 ग्राम |
| कार्बोहाइड्रेट | 71.5 ग्राम | शुगर | 5 ग्राम |
| फाइबर | 10 ग्राम | पोटैशियम | 350-360 मिलीग्राम |
| शुगर | 0 ग्राम | फाइबर | 3 ग्राम |
सेहत से जुड़े खास फायदे
- शरीर को डिटॉक्स करते हैं: कुट्टू और सिंघाड़े दोनों ही शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिससे शरीर हल्का महसूस होता है।
- पाचन में सहायक: इनमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जिससे पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
- थायराइड के लिए फायदेमंद: सिंघाड़े का आटा हाइपोथायरायडिज्म को सही करने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह थायरोक्सिन हार्मोन बनाने में सहायक होता है।
- ऊर्जा का स्रोत: इन दोनों में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन अच्छी मात्रा में होते हैं, जो व्रत के दौरान शरीर को भरपूर ऊर्जा देते हैं।
खाने के तरीके और सावधानियां
सिंघाड़े के आटे की तासीर ठंडी होती है, जबकि कुट्टू के आटे की तासीर थोड़ी गर्म होती है। अगर दोनों को मिलाकर लौकी, धनिया के पत्ते या गाजर के साथ सेवन किया जाए, तो यह ज्यादा फायदेमंद होता है। इससे शरीर को भरपूर प्रोटीन और ऊर्जा मिलती है।
इन दोनों आटे को आप कई तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं, जैसे:
- खिचड़ी: कुट्टू या सिंघाड़े को मोटा-मोटा पीसकर उसकी खिचड़ी बनाई जा सकती है।
- पराठा और पूड़ी: व्रत में अक्सर लोग आलू या साबूदाने के साथ इसके पराठे या पूड़ियां बनाते हैं।
- उपमा, हलवा और चिला: ये तीनों भी व्रत में स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प हैं।
- इडली और अप्पे: इन दोनों से इडली और अप्पे भी बनाए जा सकते हैं, जो खाने में हल्के और सेहतमंद होते हैं।
कुल मिलाकर, सिंघाड़े और कुट्टू का आटा सिर्फ व्रत के लिए नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी एक स्वस्थ और ग्लूटेन-फ्री विकल्प है, जो हमारे शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचाता है।

