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तालिबान मंत्री के भारत दौरे पर सपा एमपी जिया-उर-रहमान बर्क बोले – अब किसे शर्म आनी चाहिए?

On the Taliban minister's visit to India, SP MP Zia-ur-Rehman Barq said - who should be ashamed now?

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी इन दिनों भारत दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच मानवीय सहायता, द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

इस यात्रा के दौरान मुत्ताकी ने उत्तर प्रदेश के देवबंद जाने और आगरा में ताजमहल देखने की इच्छा भी जताई है। हालांकि, उनके इस दौरे ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क के तीखे बयान के बाद हंगामा मच गया है।

बीजेपी सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप

सपा सांसद बर्क ने तालिबान मंत्री के भारत आगमन को लेकर केंद्र और योगी सरकार दोनों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब तालिबान को लेकर उनके दादा डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने 2021 में बयान दिया था, तब भाजपा नेताओं ने उन्हें ‘देशद्रोही’ तक कह दिया था और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें ‘शर्म करने’ की नसीहत दी थी। इतना ही नहीं, यूपी पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। लेकिन अब जब वही तालिबान के विदेश मंत्री भारत दौरे पर आए हैं और देवबंद व ताजमहल जाने की योजना बना रहे हैं, तब वही सरकार उनका स्वागत कर रही है।

बर्क ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि यह सरकार का साफ दोहरा रवैया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तालिबान पर टिप्पणी करने से ही एफआईआर हो सकती है, तो अब तालिबान के मंत्री को भारत में ‘विशेष अतिथि’ जैसा सम्मान क्यों दिया जा रहा है। बर्क ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब वही तालिबानी मंत्री ताजमहल का दीदार करेंगे, देवबंद जाएंगे और योगी सरकार उन्हें पूरा सुरक्षा घेरा देगी। अब सवाल यह है कि किसे शर्म आनी चाहिए और किसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होगी?

किन बातों को लेकर जिया-उर-रहमान बर्क ने नाराज़गी ज़ाहिर की

गौरतलब है कि डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने 2021 में तालिबान को लेकर कहा था कि उन्होंने अपने देश को ‘विदेशी कब्जे से मुक्त कराया’ है, जिसके बाद उनकी जमकर आलोचना हुई थी। उस वक्त भाजपा नेताओं ने सपा को ‘तालिबान समर्थक’ बताकर घेरा था। अब उनके पोते जिया-उर-रहमान बर्क उसी मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

वहीं, मुत्ताकी का भारत दौरा कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। भारत और अफगानिस्तान के बीच मानवीय सहायता, क्षेत्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को लेकर यह यात्रा एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। मुत्ताकी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे भारत की जनता और सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और यहां के धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों का दर्शन करना चाहते हैं। हालांकि विपक्ष इसे राजनीतिक विरोधाभास बताते हुए सरकार के रुख पर सवाल खड़ा कर रहा है कि जो संगठन कभी “आतंकी” कहा गया था, उसके मंत्री का आज स्वागत किस आधार पर किया जा रहा है।

Team The Loktantra

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