द लोकतंत्र/ पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के बीच सासाराम सीट से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रत्याशी सत्येंद्र साह को सोमवार को नामांकन के तुरंत बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और राजद समर्थकों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई झारखंड के गढ़वा थाने में दर्ज 21 साल पुराने मामले में कोर्ट के आदेश पर की गई है।
नामांकन कक्ष से निकलते ही पुलिस ने लिया हिरासत में
जानकारी के मुताबिक, सत्येंद्र साह दूसरे चरण के मतदान के लिए नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे। उन्होंने पूरी प्रक्रिया पूरी की, लेकिन जैसे ही वे नामांकन कक्ष से बाहर निकले, वहां पहले से मौजूद पुलिस ने उन्हें घेर लिया और हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें स्थानीय थाने ले जाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, 2004 के एक आपराधिक मामले में गढ़वा न्यायालय ने उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
विपक्ष की साजिश है मेरी गिरफ्तारी- सत्येंद्र साह
गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्येंद्र साह ने इसे अपने राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताया। उन्होंने कहा, 21 साल पुराने केस में अब जाकर गिरफ्तारी क्यों? जब से राजद ने मुझे प्रत्याशी बनाया है, तब से विपक्षी दल डर गए हैं। यह जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश है। उन्होंने आगे कहा कि इस बार सासाराम में वे नहीं, बल्कि जनता खुद चुनाव लड़ रही है, और जनता ही इस अन्याय का जवाब देगी।
दूसरी ओर, सदर डीएसपी वन दिलीप कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के निर्देश पर की गई है। उन्होंने कहा, सत्येंद्र शाह को 2004 के मामले में जारी कोर्ट वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। इसका चुनाव या नामांकन से कोई संबंध नहीं है।
समर्थकों का हंगामा, सड़क पर जाम
गिरफ्तारी के बाद RJD समर्थक अनुमंडल कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो गए और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। भीड़ इतनी बढ़ी कि पुरानी जीटी रोड पर जाम जैसी स्थिति बन गई। समर्थकों का कहना था कि यह कार्रवाई ‘लोकतंत्र पर हमला’ है। यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले गोपालगंज के हथुआ में भी भाकपा (माले) प्रत्याशी जितेंद्र पासवान को नामांकन के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस वक्त भी समर्थकों ने प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगाए थे और सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया था।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार प्रत्याशियों की गिरफ्तारी से चुनावी माहौल में नया तनाव पैदा हो सकता है। इससे प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

