द लोकतंत्र : यूक्रेन-रूस युद्ध का दायरा काला सागर और आर्थिक युद्धक्षेत्र तक तेजी से फैल रहा है। शुक्रवार (28 नवंबर 2025) देर रात तुर्किए के बोस्फोरस स्ट्रेट के पास रूसी शैडो फ्लीट के दो तेल टैंकरों—’Kairos’ और ‘Virat’ में शक्तिशाली धमाके हुए, जिसके परिणामस्वरूप जहाज धू-धू कर जल उठे। इस घटना ने वैश्विक तेल व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। तुर्किए ने मिसाइल, ड्रोन या किसी समुद्री वाहन से बाहरी हमला होने की आशंका जताई है।
क्रू मेंबर ने दी ड्रोन हमले की सूचना
टैंकरों पर हमले के बाद क्रू मेंबर ने एक इंटरसेप्टेड ओपन-फ्रीक्वेंसी रेडियो डिस्ट्रेस कॉल में मानवरहित समुद्री ड्रोन से हमला होने की सूचना दी।
- मेडे कॉल: एक वीडियो रिकॉर्डिंग में क्रू मेंबर को ‘यह विराट है। मदद चाहिए। ड्रोन हमला। मेडे।’ कहते हुए सुना जा सकता है।
- दूसरा हमला: तुर्किए परिवहन मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पुष्टि की कि ‘विराट’ पर 29 नवंबर की सुबह फिर से हमला किया गया, जबकि काला सागर तट से लगभग 35 समुद्री मील दूर पहले ही मानवरहित समुद्री जहाज से हमला होने की सूचना थी।
यूक्रेन ने ली हमले की जिम्मेदारी
हमले की गंभीरता और प्रकृति को देखते हुए, न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है।
- संयुक्त अभियान: यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) के एक अधिकारी ने बताया कि रूसी शैडो फ्लीट के जहाजों पर हमला करने का संयुक्त अभियान एसबीयू और यूक्रेन की नौसेना ने चलाया गया था।
- मॉडर्न नेवल ड्रोन: एसबीयू के एक सूत्र ने बताया कि मॉडर्न ‘सी बेबी’ नेवल ड्रोन ने रूसी जहाजों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। साझा किए गए एक वीडियो में समुद्री ड्रोन को दोनों जहाजों की ओर बढ़ते हुए और उसके बाद विस्फोट होते हुए दिखाया गया है।
- गंभीर परिणाम: अधिकारियों ने दावा किया कि हमले का वीडियो देखकर पता चलता है कि दोनों टैंकरों का गंभीर नुकसान हुआ है, जिससे रूसी तेल परिवहन को गहरा झटका लगेगा।
शैडो फ्लीट का महत्व और जोखिम
शैडो फ्लीट (Shadow Fleet) उन टैंकरों के बेड़े को कहा जाता है जिसका उपयोग रूस पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने और अपने तेल निर्यात को जारी रखने के लिए करता है।
- आर्थिक संजीवनी: रूस के तेल और गैस निर्यात पर पश्चिमी देशों की सख्त पाबंदियों के बाद यह बेड़ा रूसी अर्थव्यवस्था का संजीवनी बना हुआ है।
- ट्रैकिंग से बचाव: इन जहाजों पर मौजूद AIS (Automatic Identification System) ट्रांसपोंडर को बंद कर दिया जाता है, जिससे इनका ट्रैकिंग सिस्टम निष्क्रिय हो जाता है और ये रडार से गायब हो जाते हैं।
यह हमला ऐसे नाजुक समय में हुआ है जब यूक्रेन पर शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए अमेरिका का भारी दबाव है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यूक्रेन अब समझौते से पहले अपनी मोलभाव की स्थिति को मजबूत करने के लिए रूसी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण अंगों को निशाना बना रहा है।

