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Astro-Spiritual Practices: शास्त्रों के अनुसार रात में सोने से पहले महिलाओं को नहीं करने चाहिए ये 4 कार्य, नकारात्मक ऊर्जा से बचने और लक्ष्मी कृपा हेतु आवश्यक

The loktnatra

द लोकतंत्र : भारतीय शास्त्रों और ज्योतिष में प्रत्येक पहर के लिए कार्य निर्धारित किए गए हैं। यह माना जाता है कि हमारे द्वारा किए गए शुभ-अशुभ कार्यों का सीधा प्रभाव हमारे जीवन और भाग्य पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात का समय (सूर्यास्त के बाद) वातावरण में ऊर्जा के बदलाव का समय होता है और इस दौरान कुछ विशेष कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। खासकर महिलाओं के लिए, रात में सोने से पहले किए गए कुछ कार्य नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं और आर्थिक समृद्धि के प्रतीक माँ लक्ष्मी को नाराज कर सकते हैं।

रात में महिलाओं के लिए वर्जित माने गए 4 कार्य

शास्त्रों में वर्णित इन नियमों का पालन मानसिक शांति और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है:

खुले बाल सोना

  • मान्यता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं को रात में अपने बाल खुले करके नहीं सोना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि खुले बाल रात के समय नकारात्मक ऊर्जा या बुरी शक्तियों को आसानी से आकर्षित कर सकते हैं। यह नियम खासकर उन महिलाओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण है जो अकेले सोती हैं।

इत्र या तेज सुगंध लगाकर सोना

  • कारण: इत्र की तेज या आकर्षक सुगंध को भी ज्योतिष में नकारात्मक शक्तियों के आकर्षण का एक माध्यम माना गया है। इसलिए महिलाओं को रात में सोने या घर से बाहर निकलने से पहले इत्र लगाने से बचना चाहिए।

सूर्यास्त के बाद बाल संवारना (कंघी करना)

  • लक्ष्मी नाराजगी: शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद कंघी करना या बालों को संवारना अशुभ माना जाता है। यह कार्य न केवल मां लक्ष्मी को नाराज कर सकता है, बल्कि इससे घर की समृद्धि पर भी विपरीत असर पड़ता है। बाल काटने और नाखून काटने जैसे अन्य शारीरिक कार्य भी रात में वर्जित हैं।

लड़ाई-झगड़े या वाद-विवाद करना

  • मानसिक अशांति: रात के समय, विशेषकर सोने से पहले, महिलाओं को किसी भी तरह के लड़ाई-झगड़े या वाद-विवाद से बचना चाहिए। रात में किया गया क्रोध न सिर्फ नींद को खराब करता है, बल्कि घर में मानसिक अशांति और नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ाता है। शांत और सकारात्मक माहौल ही लक्ष्मी के आगमन के लिए उपयुक्त माना जाता है।

यह मान्यताएं केवल धार्मिक ही नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे स्वच्छता और मानसिक शांति बनाए रखने जैसे वैज्ञानिक आधार भी छिपे होते हैं। इन नियमों का पालन एक सकारात्मक और समृद्धिदायक जीवन के लिए आवश्यक माना जाता है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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