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प्रो. वी. कामाकोटी पर Priyanka Gandhi की टिप्पणी के खिलाफ 215 शिक्षाविदों का खुला पत्र

Open letter by 215 academicians against Priyanka Gandhi's remarks on Prof. V. Kamakoti.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi वाड्रा द्वारा संसद में आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद गहराता जा रहा है। अब देशभर के 215 कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों और शिक्षाविदों ने इस मामले में एक खुला पत्र (ओपन लेटर) जारी कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा गया है कि संसद जैसी सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था में व्यक्तिगत टिप्पणियों के बजाय विचारों और तर्कों पर बहस होनी चाहिए।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब 28 जुलाई 2026 को परीक्षा सुधार से जुड़े एक विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने सरकार द्वारा गठित हाई पावर टास्क फोर्स का उल्लेख करते हुए प्रो. वी. कामाकोटी पर टिप्पणी की थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और शैक्षणिक जगत में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

‘व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, तर्कों पर हो बहस’, शिक्षाविदों ने Priyanka Gandhi के बयान पर जताई आपत्ति

प्रियंका गांधी को संबोधित खुले पत्र में शिक्षाविदों ने लिखा कि भारतीय संसद से हमेशा यह अपेक्षा की जाती है कि वहां गंभीर और तथ्यपरक बहस हो तथा असहमति भी सम्मानजनक भाषा में व्यक्त की जाए। पत्र में कहा गया कि किसी व्यक्ति की छवि बनाने या उसका उपहास करने के बजाय उसके विचारों और तर्कों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

पत्र में प्रो. वी. कामाकोटी को लेकर की गई टिप्पणी पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा गया कि चाहे यह टिप्पणी व्यंग्य के रूप में की गई हो या राजनीतिक बयानबाजी के तहत, इससे व्यापक स्तर पर चिंताएं पैदा होती हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं के अनुसार, प्रो. कामाकोटी देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक आईआईटी मद्रास का नेतृत्व कर रहे हैं और उनकी शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक उपलब्धियां व्यापक रूप से मान्य हैं।

पत्र में उनके शैक्षणिक और शोध कार्यों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया कि प्रो. कामाकोटी ने कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा प्राप्त की है, 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, 50 से अधिक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में योगदान दिया है और उन्हें डीआरडीओ एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड तथा इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन टेक्नो विजनरी अवॉर्ड जैसे सम्मान मिल चुके हैं।

वैज्ञानिक सोच और अकादमिक स्वतंत्रता पर भी रखा पक्ष

खुले पत्र में यह भी कहा गया कि प्रो. वी. कामाकोटी देश के पहले इंडस्ट्री-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विशेषज्ञों में शामिल रहे हैं। ऐसे में उन्हें केवल किसी एक विचार या टिप्पणी के आधार पर किसी विशेष पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। शिक्षाविदों ने लिखा कि किसी भी अकादमिक या वैज्ञानिक को नए विचार रखने, पारंपरिक ज्ञान पर चर्चा करने और वैज्ञानिक विमर्श में भाग लेने का अधिकार है। उनका कहना है कि यदि किसी विद्वान के विचारों पर तथ्यात्मक बहस करने के बजाय उन्हें किसी लेबल के आधार पर खारिज किया जाता है, तो इससे वैज्ञानिक सोच और बौद्धिक संवाद की संस्कृति कमजोर पड़ सकती है।

पत्र में यह भी कहा गया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अर्थ केवल असहमति जताना नहीं, बल्कि किसी भी दावे की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर मूल्यांकन करना है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने संविधान में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की भावना का भी उल्लेख करते हुए इसी दिशा में सार्वजनिक संवाद बनाए रखने की अपील की।

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद प्रियंका गांधी के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने परीक्षा सुधार से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार द्वारा गठित हाई पावर टास्क फोर्स की संरचना पर सवाल उठाते हुए प्रो. वी. कामाकोटी पर टिप्पणी की थी। इस पर अब शैक्षणिक समुदाय के एक वर्ग ने औपचारिक रूप से अपनी असहमति दर्ज कराई है। वहीं, इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से इस खुले पत्र के संदर्भ में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

यह भी पढ़ें – Journalist Intellectual Property: पत्रकार की कलम से बनते हैं मीडिया संस्थान, ख़बरनवीसों की सबसे बड़ी लड़ाई सिर्फ़ वेतन की नहीं ‘स्वामित्व’ की होनी चाहिए

Team The Loktantra

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