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Travel Spl: भारत में सबसे पहले यहाँ होगा साल 2026 का सूर्योदय; अरुणाचल प्रदेश के ‘डोंग गांव’ में नए साल का भव्य स्वागत

The loktnatra

द लोकतंत्र : वर्ष 2025 अपने अंतिम चरण में है और संपूर्ण विश्व के साथ भारत भी वर्ष 2026 के स्वागत की तैयारियों में जुटा है। जहाँ देश के महानगरों में पार्टियों और काउंडाउन का शोर होगा, वहीं प्रकृति प्रेमियों के लिए एक ऐसा दिव्य स्थान भी है जहाँ नूतन वर्ष का सूरज सबसे पहले दस्तक देगा। अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में स्थित ‘डोंग गांव’ (Dong Village) वह सौभाग्यशाली बिंदु है, जहाँ वर्ष 2026 की प्रथम स्वर्ण किरणें भारतीय धरा का स्पर्श करेंगी। भौगोलिक विशिष्टता के कारण यह स्थान पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बनने जा रहा है।

क्यों डोंग में होता है प्रथम सूर्योदय?

डोंग गांव को आधिकारिक रूप से भारत का सबसे पूर्वी बिंदु माना गया है।

  • पृथ्वी के पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन के कारण सूर्य की किरणें सबसे पहले पूर्वी हिस्से पर पड़ती हैं। डोंग की ऊंचाई और इसकी अत्यधिक पूर्वी स्थिति के कारण, यहाँ देश के बाकी हिस्सों की तुलना में सूर्योदय लगभग 60 से 90 मिनट पूर्व हो जाता है।
  • नए साल पर प्रथम सूर्योदय के साक्षी बनने के लिए पर्यटकों को तड़के 4:00 बजे से ही तैयार होना होगा, क्योंकि यहाँ आकाश 4:30 से 5:30 के बीच उजास से भर जाता है।

यात्रा मार्ग: दुर्गम रास्ते और रोमांचक ट्रैकिंग

डोंग पहुंचना स्वयं में एक साहसिक यात्रा है। सीधी हवाई सेवा न होने के कारण यहाँ की यात्रा बहु-स्तरीय होती है:

  • हवाई एवं रेल संपर्क: निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा गुवाहाटी या डिब्रूगढ़ है। रेल मार्ग के लिए तिनसुकिया (TSK) तक पहुंचना अनिवार्य है।
  • सड़क मार्ग: तिनसुकिया से अंजॉ जिले के मुख्यालय तेजू के लिए टैक्सी उपलब्ध है। यहाँ से वालॉन्ग तक का सफर पहाड़ों के बीच से गुजरता है।
  • ट्रैकिंग: अंतिम पड़ाव पर वालॉन्ग से डोंग घाटी तक लगभग 90 मिनट की पैदल ट्रैकिंग करनी होती है, जो घने जंगलों और पहाड़ी नजारों के बीच एक अद्भुत अनुभव है।

डोंग वैली के आकर्षण: नीली नदी और गर्म सोते

सूर्योदय के अलावा यहाँ की प्राकृतिक विविधता अद्वितीय है। लोहित नदी का स्वच्छ नीला पानी और पहाड़ों का मिश्रण एक कैनवास जैसी छवि प्रस्तुत करता है।

  • तिलम हॉट स्प्रिंग: सर्दियों की ठंड में यहाँ के मिनरल युक्त गर्म पानी के सोते में स्नान करना चिकित्सीय लाभ प्रदान करता है।
  • सांस्कृतिक अनुभव: यहाँ मेयो (Meyor) जनजाति का वास है, जिनकी समृद्ध संस्कृति और आतिथ्य सत्कार पर्यटकों के मन को मोह लेता है।

इको-टूरिज्म को बढ़ावा

  • पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में इस प्रकार के ‘ऑफबीट’ डेस्टिनेशंस की बढ़ती लोकप्रियता स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास से आगामी वर्षों में डोंग गांव एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा।

निष्कर्षतः, यदि आप वर्ष 2026 की शुरुआत भीड़-भाड़ से दूर, शांति और प्रकृति के समीप करना चाहते हैं, तो डोंग गांव से बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता। यहाँ का प्रथम सूर्योदय न केवल आपकी आँखों को सुकून देगा, बल्कि आपके भीतर नई ऊर्जा का संचार भी करेगा।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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