द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Jamia Millia Islamia यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। राजधानी दिल्ली स्थित इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में मंगलवार (28 अप्रैल) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के एक प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया। छात्रों के विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच कैंपस के बाहर भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए Delhi Police के साथ-साथ Railway Protection Force के जवान भी मौके पर तैनात किए गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद जामिया मिलिया इस्लामिया की इंजीनियरिंग फैकल्टी में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन आरएसएस से जुड़े लोगों की ओर से किया जा रहा था। जैसे ही इसकी सूचना छात्रों को मिली, उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में एकत्र हो गए और कार्यक्रम के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
छात्रों का विरोध प्रदर्शन, कैंपस में बढ़ा तनाव
Jamia Millia Islamia के छात्रों का कहना है कि कैंपस एक शैक्षणिक और वैचारिक स्वतंत्रता का स्थान है, जहां किसी विशेष राजनीतिक या वैचारिक संगठन के कार्यक्रम को अनुमति देना गलत है। छात्रों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बिना पर्याप्त संवाद के इस कार्यक्रम को मंजूरी दी, जिससे छात्रों में नाराजगी बढ़ गई।
विरोध कर रहे छात्रों ने साफ कहा कि वे कैंपस के भीतर ऐसे किसी आयोजन को स्वीकार नहीं करेंगे। इस दौरान कई छात्रों ने पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन किया और कार्यक्रम रद्द करने की मांग की। नारेबाजी और हंगामे के बीच कैंपस का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, प्रशासन अलर्ट मोड पर
छात्रों के विरोध को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन और जिला प्रशासन तुरंत अलर्ट हो गया। किसी भी संभावित झड़प या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए कैंपस के मुख्य गेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। Delhi Police और Railway Protection Force के जवानों को रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। जामिया मिलिया इस्लामिया पहले भी कई बार राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर सुर्खियों में रही है। ऐसे में आरएसएस कार्यक्रम को लेकर उठा यह नया विवाद एक बार फिर विश्वविद्यालय की राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस छेड़ सकता है।

