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West Bengal Election 2026: राहुल गांधी का दावा- वोटिंग खत्म होते ही बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, सरकार ने किया खंडन

West Bengal Election 2026: Rahul Gandhi Claims Petrol and Diesel Prices Will Rise Immediately After Voting Ends; Government Issues Denial

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : West Bengal Election 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और Indian National Congress समेत सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा दावा कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि दूसरे और अंतिम चरण का मतदान समाप्त होते ही मोदी सरकार आम जनता पर महंगाई का बोझ डालते हुए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

मंगलवार (28 अप्रैल) को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि चुनावी राहत खत्म होने वाली है और 29 अप्रैल के बाद जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी। उन्होंने लिखा, चुनावी राहत खत्म, महंगाई की गर्मी तैयार! 29 अप्रैल के बाद देखिए पेट्रोल, डीजल, सब महंगे होंगे। जब तेल सस्ता था, मोदी सरकार ने अपना मुनाफा रखा। अब महंगा है, तो बोझ आप पर डालेगी। सस्ते की लूट मचाती सरकार, जनता को बस महंगाई की मार। राहुल के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

सरकार ने बढ़ती कीमतों की अटकलों पर दी सफाई

Government of India ने राहुल गांधी के दावों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। सरकार की ओर से कहा गया कि चुनाव खत्म होने के बाद भी कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के चलते वैश्विक कच्चे तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

आखिर क्यों उठी पेट्रोल-डीजल महंगे होने की चर्चा?

देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में लगातार चौथे साल कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के कारण पिछले दो महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक लागत और बिक्री मूल्य के बीच बढ़ते अंतर की वजह से सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। इसी कारण बाजार में अटकलें लगाई जा रही थीं कि तमिलनाडु, असम, केरल, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा हो सकता है। अब देखना होगा कि चुनावी माहौल के बीच उठी इस महंगाई की बहस जनता पर कितना असर डालती है और सरकार आगे क्या फैसला लेती है।

यह भी पढ़ें – Jamia Millia Islamia Controversy: RSS कार्यक्रम को लेकर जामिया कैंपस में हंगामा, भारी पुलिस बल तैनात

Team The Loktantra

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