द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक मस्जिद पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मस्जिद को गिराए जाने की घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद Ziaur Rahman Barq ने प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर इस प्रकार की कार्रवाई से लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं और अब इस मुद्दे पर संवैधानिक तरीके से कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
सपा सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि तमाम कानूनी प्रयासों और गुहार के बावजूद संभल प्रशासन ने कसेरवा गांव स्थित मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। बर्क ने कहा कि कार्रवाई जिस तरीके से की गई, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों ने पूर्व निर्धारित योजना के तहत कदम उठाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्थानीय लोगों को पर्याप्त जानकारी दिए बिना कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
सपा सांसद Ziaur Rahman Barq ने धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया
जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी सरकार को इसे प्रभावित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर कार्रवाई की है। सांसद ने लोगों से शांति बनाए रखने और संवैधानिक तथा कानूनी तरीकों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि इस मामले को अदालत में चुनौती दी जाएगी और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तलाशा जाएगा। बर्क के अनुसार, किसी भी धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में संबंधित पक्षों को पूरा अवसर दिए बिना कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी।
प्रशासन ने कार्रवाई को बताया कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा
दूसरी ओर जिला प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। प्रशासन के अनुसार, संबंधित मस्जिद सार्वजनिक उपयोग की भूमि, जिसे कब्रिस्तान के रूप में दर्ज किया गया था, पर अवैध रूप से निर्मित पाई गई थी। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की गई और तहसीलदार न्यायालय ने अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया था।
जिला प्रशासन ने बताया कि इस आदेश के खिलाफ उच्च स्तर पर अपील भी दायर की गई थी, लेकिन सुनवाई के बाद निर्माण को अवैध माना गया। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए ढांचे को हटाया गया। अधिकारियों का कहना है कि जिले में सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है और इसी क्रम में यह कदम उठाया गया। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी बहस तेज हो गई है। जहां विपक्ष प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन इसे न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

