द लोकतंत्र/ मुंबई : मुंबई में शनिवार (8 अगस्त) को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक आदित्य ठाकरे से Cockroach Janata Party के प्रवक्ता सौरव दास और पार्टी नेता रत्ना सिंह ने मुलाकात की। इस बैठक में हाल के छात्र आंदोलनों, युवाओं की मांगों और विभिन्न सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुलाकात के बाद दोनों पक्षों ने इसे सकारात्मक और सार्थक संवाद बताया।
बैठक के बाद सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आदित्य ठाकरे के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि उनसे मिलकर बेहद अच्छा लगा। उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान शिवसेना (यूबीटी) और आदित्य ठाकरे द्वारा दिए गए समर्थन के लिए आभार भी व्यक्त किया।
छात्र आंदोलन और युवा मुद्दों पर हुई चर्चा, Cockroach Janata Party ने समर्थन के लिए जताया आभार
Cockroach Janata Party के नेताओं ने बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान आदित्य ठाकरे और उनकी पार्टी ने युवाओं की आवाज़ को समर्थन दिया। इसी समर्थन के लिए उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर धन्यवाद दिया। बैठक में संगठन द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों, छात्रों से जुड़े मुद्दों और भविष्य में युवाओं के हितों से जुड़े प्रयासों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
पार्टी नेताओं का कहना है कि युवाओं की समस्याओं को लेकर व्यापक जनसमर्थन तैयार करना और लोकतांत्रिक तरीके से उनकी आवाज़ को मंच देना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से संवाद का सिलसिला जारी रहेगा।
आदित्य ठाकरे और सौरव दास ने सोशल मीडिया पर साझा किए विचार
मुलाकात के बाद आदित्य ठाकरे ने भी अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सौरव दास के साथ हुई चर्चा में Cockroach Janata Party के आंदोलन, उसकी प्रमुख मांगों और उन युवा भारतीयों के बारे में बातचीत हुई जिन्होंने आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने युवाओं की सक्रिय भागीदारी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
वहीं सौरव दास ने आदित्य ठाकरे की पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि इस आंदोलन की यादें हमेशा प्रेरित करेंगी। उन्होंने महाराष्ट्र में आंदोलनकारी युवाओं को कानूनी सहायता, संगठनात्मक सहयोग और समर्थन देने के लिए आदित्य ठाकरे का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा कि युवा अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई में सभी एक साथ खड़े हैं। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में इसे युवाओं से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों के बीच बढ़ते संवाद के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि फिलहाल दोनों पक्षों ने इसे छात्र हितों और लोकतांत्रिक संवाद तक ही सीमित बताया है।



