Advertisement Carousel
Spiritual

Vastu Tips 2026: नए साल का कैलेंडर किस दिशा में लगाना है शुभ? एक छोटी सी गलती रोक सकती है आपकी तरक्की

The loktnatra

द लोकतंत्र : नववर्ष का आगमन नई आशाओं और संकल्पों के साथ होता है। इस अवसर पर प्रायः हर भारतीय घर और कार्यालय में नया कैलेंडर लगाया जाता है। यद्यपि कैलेंडर मात्र तिथियों को देखने का एक साधन प्रतीत होता है, किंतु वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह समय की गति और ऊर्जा का प्रतीक है। वास्तु विशेषज्ञों का तर्क है कि कैलेंडर को दीवार पर लगाते समय की गई सूक्ष्म अनदेखी घर की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित कर सकती है। वर्ष 2026 को सफलता और समृद्धि का वर्ष बनाने के लिए दिशाओं के इस विज्ञान को समझना अपरिहार्य है।

दिशाओं का प्रभाव: किस द्वार से आएगी समृद्धि?

वास्तु शास्त्र में प्रत्येक दिशा एक विशिष्ट तत्व और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। कैलेंडर लगाने के लिए सही कोने का चयन आपके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को निखार सकता है।

  • पूर्व दिशा: प्रगति और नई शुरुआत का द्वारपूर्व दिशा के स्वामी भगवान सूर्य हैं। नए विचारों के क्रियान्वयन और जीवन में निरंतर प्रगति के लिए कैलेंडर को पूर्वी दीवार पर लगाना सर्वोत्तम है। यह स्थान खासकर विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए ऊर्जावान सिद्ध होता है।
  • उत्तर दिशा: आर्थिक स्थिरता एवं अवसरकुबेर की दिशा मानी जाने वाली उत्तर दिशा व्यापारिक लाभ से जुड़ी है। यदि आप प्रोफेशनल ग्रोथ चाहते हैं, तो यहाँ सरल और स्पष्ट डिजाइन का कैलेंडर लगाएं। यह चुंबकीय प्रवाह को अनुकूलित करके स्थिरता प्रदान करता है।

सृजनात्मकता एवं आध्यात्मिकता का संगम

वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, कैलेंडर के चित्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितनी कि दिशा।

  • पश्चिम दिशा: यह दिशा कलात्मकता और प्रेरणा की है। रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों को अपना कैलेंडर इसी दिशा में स्थापित करना चाहिए।
  • उत्तर-पूर्व (ईशान कोण): आध्यात्मिक चित्रों या प्रेरक उद्धरणों वाले कैलेंडर के लिए यह ईश्वरीय स्थान सबसे उपयुक्त है। यह मानसिक शांति और जागरूकता को बढ़ावा देता है।
  • दक्षिण-पश्चिम: पारिवारिक संबंधों में मधुरता और स्थायित्व के लिए यहाँ सुखद तस्वीरों वाला कैलेंडर लगाना शुभ होता है।

वर्जित क्षेत्र: कहाँ भूलकर भी न लगाएं कैलेंडर

  • वास्तु विशेषज्ञों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कैलेंडर को कभी भी दक्षिण दिशा की दीवार पर नहीं टांगना चाहिए। दक्षिण दिशा स्थिरता की है, और समय प्रवाह का प्रतीक है; इनका विरोधाभास नकारात्मकता उत्पन्न कर सकता है। इसके अतिरिक्त, दरवाजों के पीछे या खिड़कियों के ठीक ऊपर कैलेंडर लगाने से बचें, क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश मार्ग में बाधा डालता है। पुराने कैलेंडर को दीवार पर लगे रहने देना भी वास्तु दोष माना जाता है, जो रुके हुए वक्त का संकेत देता है।

निष्कर्षतः, कैलेंडर मात्र तारीखें बताने वाला कागज नहीं है, बल्कि यह आपके आगामी समय की रूपरेखा तय करता है। वर्ष 2026 की शुरुआत में कैलेंडर को सही वास्तु सम्मत स्थान देकर आप अपने घर में सौभाग्य, स्वास्थ्य और सफलता को आमंत्रित कर सकते हैं। नियमों का पालन ही समृद्धि का आधार है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

साधना के चार महीने
Spiritual

Chaturmas 2025: चार महीने की साधना, संयम और सात्विक जीवन का शुभ आरंभ

द लोकतंत्र: चातुर्मास 2025 की शुरुआत 6 जुलाई से हो चुकी है, और यह 1 नवंबर 2025 तक चलेगा। यह चार
SUN SET
Spiritual

संध्याकाल में न करें इन चीजों का लेन-देन, वरना लौट सकती हैं मां लक्ष्मी

द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में संध्याकाल यानी शाम का समय देवी लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। यह वक्त