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Gut Health: आंतों को रखना है तंदुरुस्त? इडली-डोसा के अलावा आज़माएं भारत के ये 5 पारंपरिक फर्मेंटेड फूड्स

The loktnatra

द लोकतंत्र : अगर आपकी आंतें (Gut) स्वस्थ हैं, तो आपका पूरा शरीर सही तरीके से काम करता है। मेडिकल साइंस का मानना है कि हमारी इम्यूनिटी का एक बड़ा हिस्सा हमारे पेट पर निर्भर करता है। गट हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए ‘गुड बैक्टीरिया’ की जरूरत होती है, जो हमें फर्मेंटेड (खमीर उठे हुए) प्रोबायोटिक फूड से मिलते हैं।

जब भी फर्मेंटेड फूड की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले इडली और डोसा का नाम आता है। लेकिन भारत के अलग-अलग कोनों में ऐसे कई पारंपरिक व्यंजन हैं, जो न केवल स्वाद में लाजवाब हैं बल्कि आपकी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

1. पांता भात (बंगाल और ओडिशा का खास)

पांता भात एक बहुत ही सीधा और असरदार व्यंजन है। इसे रात के बचे हुए चावलों को पानी में भिगोकर बनाया जाता है। रात भर भीगे रहने से इसमें नेचुरल खमीर उठता है। सुबह इसमें दही, थोड़ा नमक, हरी मिर्च और कच्चा प्याज मिलाकर खाया जाता है। यह गर्मियों में पेट को ठंडा रखने और डाइजेशन सुधारने का सबसे आसान तरीका है।

2. कांजी (नेचुरल प्रोबायोटिक ड्रिंक)

कांजी एक बेहद हेल्दी फर्मेंटेड ड्रिंक है। इसे आमतौर पर काली गाजर या चुकंदर से बनाया जाता है। इसमें राई, नमक और पानी डालकर धूप में रखा जाता है, जिससे इसमें प्रोबायोटिक गुण पैदा होते हैं। यह ड्रिंक विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होती है और पाचन तंत्र को तुरंत बूस्ट करती है।

3. असमिया खोरिसा (बांस के कोपलों का जादू)

असम में बांस की नरम कोपलों (Bamboo Shoots) को फर्मेंट करके ‘खोरिसा’ तैयार किया जाता है। फर्मेंटेशन की वजह से इसमें एक तीखा और बढ़िया स्वाद आता है। यह फाइबर का खजाना है और मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करता है। पूर्वोत्तर भारत में इसे अचार की तरह या नॉनवेज डिशेज के साथ खूब पसंद किया जाता है।

4. गुंदरूक (पहाड़ों की सौगात)

हिमालयी क्षेत्रों में मशहूर ‘गुंदरूक’ सरसों या मूली के पत्तों को फर्मेंट करके बनाया जाता है। पत्तों को फर्मेंट करने के बाद उन्हें सुखा लिया जाता है। इसका इस्तेमाल सूप या अचार के रूप में होता है। यह पेट के लिए बहुत हल्का होता है और शरीर को ऊर्जा देता है।

5. घर का बना ताजा दही

प्रोबायोटिक्स पाने का सबसे पुराना और असरदार तरीका है—दही। लेकिन यहाँ एक बात का ध्यान रखें कि पैकेट वाला बाजार का दही वह फायदा नहीं देता जो घर का बना दही देता है। घर के दही में लाइव बैक्टीरिया होते हैं जो आंतों की सफाई करते हैं और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर रखते हैं।

हमारी रसोई में ही सेहत के कई राज छिपे हैं। इन पारंपरिक फर्मेंटेड फूड्स को अपनी डाइट का हिस्सा बनाकर आप न केवल अपनी गट हेल्थ को सुधार सकते हैं, बल्कि कई बीमारियों से भी बच सकते हैं।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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