द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ‘समझौते वाली राजनीति’ का प्रतिनिधित्व करता है और कांग्रेस एक ‘समझौतावादी राजनीतिक दल’ बन चुकी है। गोयल का यह बयान उस समय आया है जब राहुल गांधी भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर ‘पीएम समझौता कर रहे हैं’ जैसे आरोप लगा रहे हैं।
गोयल ने कहा कि कांग्रेस के इतिहास में कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी, इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले निर्णयों पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच हाल ही में AI समिट के दौरान हुए ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। गोयल ने कहा कि राहुल गांधी ‘नकारात्मक राजनीति के पोस्टर बॉय’ बन गए हैं और वे केवल चुनिंदा सवालों का सामना करना पसंद करते हैं। उनका दावा था कि राहुल गांधी असहज सवालों से बचते हैं और प्रेस के साथ खुले संवाद से कतराते हैं।
बोफोर्स, 1971 युद्ध और ‘विदेशी प्रभाव’ के आरोपों पर सियासी घमासान
पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों में पारदर्शिता की कमी रही। उन्होंने बोफोर्स प्रकरण और 1971 के युद्ध के बाद की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व पर पहले भी राष्ट्रीय हितों से समझौते के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को पहले भी निराधार बताया जाता रहा है।
भाजपा के अन्य नेताओं ने भी नेहरू-गांधी परिवार पर विदेशी प्रभाव में काम करने के आरोप लगाए हैं। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि भाजपा मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए व्यक्तिगत हमलों का सहारा ले रही है। इस बीच, AI इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत मंडपम में इंडियन यूथ कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर भी विवाद जारी है। IYC प्रमुख उदय भानु चिब को पुलिस ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, AI समिट और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक मंचों पर और गर्मा सकता है।

