द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : India-Iran Relations भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरानी विदेशमंत्री Seyed Abbas Araghchi के बीच बुधवार शाम अहम टेलीफोनिक बातचीत हुई, जिसमें पश्चिम एशिया में जारी तनाव, युद्धविराम और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की मॉस्को यात्रा के दो दिन बाद हुई इस बातचीत को कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बातचीत में अमेरिका-ईरान संघर्ष, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय शांति बहाली के प्रयासों पर भी चर्चा हुई।
विदेश मंत्री S. Jaishankar ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि ईरानी विदेश मंत्री का फोन आया था, जिसमें मौजूदा स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई है।
ईरानी दूतावास का बयान, युद्धविराम और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
नई दिल्ली स्थित Embassy of Iran, New Delhi ने इस बातचीत को लेकर बयान जारी किया। दूतावास के अनुसार, दोनों नेताओं ने युद्धविराम, भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ताजा घटनाक्रमों को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया।
सूत्रों के मुताबिक, बातचीत में अमेरिकी नाकाबंदी और ईरान द्वारा Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र हुआ। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में वहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता अब तक बेनतीजा
ईरान और अमेरिका के बीच 11 और 12 अप्रैल को Islamabad में शांति वार्ता का पहला दौर आयोजित हुआ था, लेकिन इससे युद्ध खत्म करने की दिशा में कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री ने Oman, Pakistan और Moscow का दौरा कर कूटनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश की।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पिछले सप्ताह ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया, ताकि तेहरान को संघर्ष समाप्त करने के लिए प्रस्ताव तैयार करने का समय मिल सके।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और कई शीर्ष कमांडरों के मारे जाने की खबरों ने वैश्विक राजनीति को हिला दिया था। भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब पूरा पश्चिम एशिया युद्ध और कूटनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

