द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिका द्वारा भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दिए जाने पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या भारत अब अपने हित में फैसले लेने के लिए भी अनुमति का मोहताज हो गया है। भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका द्वारा 30 दिन की अस्थायी छूट दिए जाने के बाद देश की विदेश नीति पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री Salman Khurshid ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की कूटनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी दूसरे देश द्वारा यह तय करना कि भारत क्या कर सकता है और क्या नहीं, बेहद चिंताजनक स्थिति है।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह बहुत खतरनाक संकेत है कि समय-समय पर भारत को यह बताया जाए कि उसे कौन-से कदम उठाने की अनुमति है। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत की स्थिति अब ऐसी हो गई है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के फैसले भी किसी अन्य देश की अनुमति से लेगा। उनके अनुसार, इस विषय पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
खुर्शीद ने केंद्र की विदेश नीति को लेकर तंज कसते हुए कहा कि सरकार खुद अपनी नीति स्पष्ट नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग मंचों पर बयान देती है, लेकिन उसके परिणाम क्या हैं, यह साफ दिखाई नहीं देता।
अमेरिका-ईरान तनाव और भारत की कूटनीतिक चुनौती
कांग्रेस नेता ने हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के युद्धपोत IRIS Dena पर किए गए हमले का भी जिक्र किया। इस हमले में 87 नाविकों की मौत की खबर सामने आई थी। खुर्शीद ने कहा कि यदि भारत के निकट क्षेत्र में ऐसी घटना होती है और भारत को इसकी जानकारी भी नहीं दी जाती, तो यह भारत की कूटनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने भारत को इसकी जानकारी दी होती, तो वह और भी चिंताजनक होता, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम में प्रभावी भूमिका निभाने की स्थिति में नहीं है। यह बयान उस समय आया है जब कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचा था और वहां ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की हत्या पर शोक व्यक्त किया।
भारत-ईरान संबंधों का लंबा इतिहास
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भारत और ईरान के संबंध हजारों साल पुराने हैं। दोनों देशों के बीच 1950 में मित्रता संधि भी हुई थी और 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद भी संबंध कायम रहे। कांग्रेस का मानना है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाना चाहिए। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित कूटनीति अपना रहा है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के बीच यह मुद्दा भारत की विदेश नीति और रणनीतिक संतुलन की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

