द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने देश में संभावित LPG संकट को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संसद परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपा रही है और देश में गैस आपूर्ति से जुड़ी समस्या आगे और गंभीर हो सकती है।
सुधाकर सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बावजूद सरकार स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं रख रही है। उन्होंने इसे सरकार की विदेश नीति की विफलता बताते हुए कहा कि ईंधन की कीमतों और आपूर्ति पर इसका असर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार अगर मौजूदा हालात बने रहे तो आने वाले समय में LPG आपूर्ति की समस्या और बढ़ सकती है।
दरअसल, वैश्विक स्तर पर LPG बाजार में अस्थिरता की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है, जो भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। भारत की लगभग 85 से 90 प्रतिशत LPG आयात इसी रास्ते से होकर आते हैं, जिससे इस क्षेत्र में तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
घरेलू आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए सरकार के कदम
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG की आपूर्ति सुरक्षित है और किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कुछ विशेष प्रावधान लागू किए हैं।
इसके तहत रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे LPG उत्पादन को अधिकतम करें और प्रोपेन तथा ब्यूटेन जैसी गैसों को अन्य औद्योगिक या पेट्रोकेमिकल उपयोगों में भेजने पर रोक लगाई जाए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। हालांकि होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की कमी की शिकायत की है। बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में कुछ होटल और रेस्तरां को सीमित गैस उपलब्धता के कारण अपने संचालन समय में बदलाव करना पड़ा है या मेन्यू में कटौती करनी पड़ी है।
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो गैर-घरेलू उपभोक्ताओं की समस्याओं और आपूर्ति वितरण से जुड़े अवरोधों का आकलन करेगी। इसके साथ ही भारत ने अपनी ऊर्जा आयात रणनीति में विविधता लाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं और अमेरिका के गल्फ कोस्ट सहित अन्य स्रोतों से गैस आयात बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
इसी बीच राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देना सरकार का सही फैसला है। उन्होंने माना कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारतीय उद्योगों पर असर पड़ना तय है, खासकर टेक्सटाइल, पेट्रोकेमिकल और ऊर्जा क्षेत्र पर। सरकारी सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में घरेलू LPG उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और जल्द ही नए गैस कंसाइनमेंट देश में पहुंचने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जिससे फिलहाल पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं बताई जा रही है।

