द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुआ यह सैन्य तनाव अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है और इसकी वजह से दुनिया के कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से एलपीजी आपूर्ति को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं।
इसी बीच भारत सरकार ने स्थिति पर बड़ा अपडेट दिया है। पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान किसी भी भारतीय जहाज या नाविक के साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।
उन्होंने बताया कि फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले कुल 24 जहाज मौजूद थे। इनमें से दो एलपीजी कैरियर जहाज शिवालिक और नंदा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। इन जहाजों में लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है और इनके 16 तथा 17 मार्च को क्रमशः मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, अभी भी फारस की खाड़ी में भारत के 22 जहाज मौजूद हैं, जिन पर कुल 611 भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार इन जहाजों की गतिविधियों और सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है।
LPG की कालाबाजारी रोकने के लिए देशभर में छापेमारी
ऊर्जा आपूर्ति को लेकर संभावित संकट के बीच सरकार ने घरेलू बाजार में एलपीजी की कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती बढ़ा दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी सुजाता शर्मा ने बताया कि कई राज्यों में संयुक्त टीमों द्वारा लगातार निरीक्षण और छापेमारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाया गया है। केवल उत्तर प्रदेश में ही लगभग 1400 स्थानों पर औचक निरीक्षण किए गए, जिसके बाद करीब 20 एफआईआर दर्ज की गईं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। लगभग 19 व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया भी जारी है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा और कर्नाटक में भी छापेमारी अभियान चलाया गया है।
सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आम लोगों को गैस की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए। इसके साथ ही एलपीजी के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ाया गया है। उत्पादन पहले 10 प्रतिशत था, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर अब लगभग 31 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है।
सरकार ने उपभोक्ताओं को यह भी सलाह दी है कि गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों का पालन करें। शहरी क्षेत्रों में एक सिलेंडर की डिलीवरी और अगली बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर रखा गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह सीमा अधिकतम 45 दिन निर्धारित की गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव के बावजूद भारत सरकार की सक्रिय रणनीति और आपूर्ति प्रबंधन के कारण फिलहाल घरेलू गैस उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है।

