द लोकतंत्र/ पॉलिटिकल डेस्क : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। भारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए बताया कि राज्य में इस बार दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को होगी, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को कराया जाएगा। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछली बार यानी 2021 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान कराया गया था, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को कम चरणों में पूरा करने का फैसला लिया है। चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी दल चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो चुका है। जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अपनी सरकार को बरकरार रखने की कोशिश में है, वहीं भारतीय जनता पार्टी राज्य में सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। ऐसे में चुनाव से पहले आए ओपिनियन पोल ने सियासी हलकों में चर्चा और बढ़ा दी है।
ओपिनियन पोल में किसका पलड़ा भारी?
MATRIZE-IANS द्वारा किए गए ओपिनियन पोल के अनुसार पश्चिम बंगाल में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से टीएमसी को लगभग 155 से 170 सीटें मिल सकती हैं। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार राज्य की सत्ता में वापसी कर सकती हैं। पश्चिम बंगाल में बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी को इस चुनाव में 100 से 115 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा एआईएमआईएम को 5 से 6 सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य दलों को एक या उससे कम सीट मिलने की संभावना बताई गई है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 2011 से लगातार सत्ता में है। 2021 के चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटों पर जीत दर्ज कर बड़ी जीत हासिल की थी। उस चुनाव में बीजेपी ने भी अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया था और उसकी सीटों की संख्या 3 से बढ़कर 77 तक पहुंच गई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम होगा। एक तरफ टीएमसी अपनी सत्ता बचाने की कोशिश करेगी, वहीं बीजेपी और अन्य दल भी चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में अंतिम फैसला जनता के मतों से ही तय होगा।

