द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। प्रियंका चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विवाद लंबे समय से चल रहा था और अब संभव है कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि भोजशाला को लेकर दोनों पक्ष पहले से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे और अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद अगला कदम सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के रूप में देखा जा सकता है। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह एक संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक मामला है, इसलिए सभी पक्षों को संयम बनाए रखना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि भोजशाला 11वीं शताब्दी का मंदिर माना जाता है और इसकी मुख्य मूर्ति को अंग्रेजों के दौर में ले जाया गया था, जो आज भी ब्रिटिश म्यूजियम में मौजूद बताई जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब तक जिस व्यवस्था के तहत मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज होती थी, उस पर नए फैसले का क्या असर पड़ेगा।
बीजेपी पर साधा निशाना, सांप्रदायिक तनाव की जताई आशंका
प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी लगातार हिंदू-मुस्लिम विवादों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करती रही है। उन्होंने कहा कि यह आशंका बनी हुई है कि भोजशाला का मामला भी राजनीतिक और धार्मिक ध्रुवीकरण का केंद्र बन सकता है। उनके मुताबिक, अगर ऐसा हुआ तो यह मध्य प्रदेश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सभी पक्षों को शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसी भी प्रकार का धार्मिक उन्माद या तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि मामला सुप्रीम कोर्ट जाता है, तो वहां से आने वाला फैसला देश के सामने अंतिम निष्कर्ष के रूप में देखा जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भोजशाला विवाद आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
हाई कोर्ट ने भोजशाला को माना मंदिर
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित भोजशाला विवादित स्थल को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया है। इसके साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को हर शुक्रवार भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य और साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि यह स्थल परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा हुआ था। कोर्ट के अनुसार, यहां संस्कृत शिक्षण केंद्र और देवी सरस्वती के मंदिर होने के संकेत भी मिले हैं। भोजशाला विवाद लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक बहस का विषय रहा है। फैसले के बाद अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि क्या यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा और आगे इसकी कानूनी दिशा क्या होगी।

