द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के नगरीय विकास और औद्योगिक निवेश को नई गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहरों के विकास के लिए धनराशि स्वीकृत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी और शहरों का विकास अधिक सुनियोजित एवं आधुनिक तरीके से किया जा सकेगा।
राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या और आधारभूत सुविधाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराती है। यह सहायता अधिकतम 20 वर्षों तक दी जा सकती है। इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर आधुनिक नगरीय अवसंरचना तैयार करने में मदद मिलेगी।
Yogi Adityanath सरकार द्वारा आगरा, बरेली और प्रयागराज के लिए 225 करोड़ रुपये की पहली किस्त मंजूर
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसी के तहत आगरा, बरेली और प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास के लिए कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है। इसके सापेक्ष प्रथम चरण में 225 करोड़ रुपये जारी करने की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
सरकार का उद्देश्य इन शहरों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर परिवहन व्यवस्था, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्तापूर्ण आवासीय व्यवस्थाओं से लैस करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। प्रदेश सरकार का यह कदम भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और योजनाबद्ध शहरीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Yogi Adityanath सरकार द्वारा यूपी सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन, निवेशकों को मिलेगा बड़ा लाभ
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई। सरकार के अनुसार बदलते औद्योगिक माहौल, निवेशकों की जरूरतों और अन्य राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा को देखते हुए नीति में बदलाव आवश्यक था। साथ ही इसे भारत सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अनुरूप भी बनाया गया है।
19 जनवरी 2024 को अधिसूचित यह नीति पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी। संशोधित नीति को अधिक निवेशक-अनुकूल बनाया गया है ताकि प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित किए जा सकें। सरकार का दावा है कि इन संशोधनों से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। हालांकि निवेशकों को परियोजना के वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद कम से कम तीन वर्षों तक उत्पादन संचालन जारी रखने की शर्त का पालन करना होगा।
प्रदेश सरकार का मानना है कि इन फैसलों से एक ओर जहां उत्तर प्रदेश में आधुनिक शहरों का विकास होगा, वहीं दूसरी ओर सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ने से राज्य देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

