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पश्चिम बंगाल में TMC में बगावत के दावे से बढ़ी सियासी हलचल, हुमायूं कबीर ने कहा- खेल तो अब शुरू होगा…

Political Turmoil Intensifies in West Bengal Amid Claims of Rebellion within the TMC; Humayun Kabir Declares: "The Game Has Just Begun..."

द लोकतंत्र/ कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर कथित असंतोष और बगावत की खबरों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने टीएमसी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में इसका बड़ा राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है। उन्होंने विशेष रूप से अभिषेक बनर्जी को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ विधायकों की अनदेखी कर शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुना गया, जिससे कई जनप्रतिनिधियों में नाराजगी है।

हुमायूं कबीर ने दावा किया कि टीएमसी के भीतर बड़ी संख्या में विधायक मौजूदा नेतृत्व से असहमत हैं और पार्टी के भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि ममता बनर्जी चुनाव हारने के बावजूद मुख्यमंत्री बनीं, जबकि पार्टी के विधायकों ने बहुमत हासिल किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार किया गया है। हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब वास्तविक “खेला” शुरू होने वाला है और आने वाले दिनों में टीएमसी की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

TMC के 58 बागी विधायकों के समर्थन का दावा, लोकसभा सांसदों पर भी अटकलें

हुमायूं कबीर ने दावा किया कि टीएमसी के 60 से अधिक विधायक पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खड़े हो चुके हैं और एक नए राजनीतिक विकल्प की मांग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि पार्टी के कई सांसद भी मौजूदा नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। उनके अनुसार, टीएमसी के 41 सांसदों में से करीब 20 सांसद भविष्य में अलग रुख अपना सकते हैं और पार्टी नेतृत्व को चुनौती दे सकते हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इनके बाद राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

इस बीच तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने उनके नेतृत्व वाले बागी गुट को विधायक दल के रूप में मान्यता दे दी है। बताया जा रहा है कि 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

TMC ने किया पलटवार, कहा- ममता बनर्जी ही पार्टी की पहचान

बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच टीएमसी ने इन दावों को खारिज करते हुए पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया है। पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि टीएमसी और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पर्याय हैं और पार्टी का हर कार्यकर्ता उनके नेतृत्व में एकजुट है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग टीएमसी के चुनाव चिह्न और ममता बनर्जी की लोकप्रियता के आधार पर चुनाव जीतकर अब दूसरे राजनीतिक खेमों के प्रभाव में आने की कोशिश कर रहे हैं।

कुणाल घोष ने सवाल उठाया कि यदि बागी नेता वास्तव में ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं, तो वे पार्टी द्वारा चुने गए नेतृत्व को स्वीकार क्यों नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीएमसी के भीतर किसी बड़े विभाजन की संभावना नहीं है और पार्टी पूरी तरह मजबूत स्थिति में है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दावों और प्रतिदावों के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति आने वाले दिनों में और अधिक दिलचस्प हो सकती है।

यह भी पढ़ें – वाराणसी मंडल संसदीय समिति की बैठक में Deoria के विकास को मिली नई गति, MP शशांक मणि के प्रतिनिधि Abhishek Pandey ‘रूपक’ ने उठाए 21 अहम मुद्दे

Team The Loktantra

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